लल्लापुरा निवासी इरफान की बेटी की शादी 13 अक्तूबर को हुई। उसने शादी अनुदान के लिए जुलाई में आवेदन किया था लेकिन चार माह बीतने के बाद भी उसे अनुदान की धनराशि नहीं मिली। अंतत: उसे पड़ोसी से कर्ज लेकर बेटी की शादी करनी पड़ी।
केस टू-
बजरडीहा के रहने वाले हारुन अंसारी ने भी चार महीने पहले शादी अनुदान के लिए आवेदन किया था। कई बार दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी उसे अनुदान की धनराशि नहीं मिल पाई। हारुन ने अपने दोस्त से कर्ज लेकर दो नवंबर बेटी की शादी की।
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वाराणसी। ये दो मामले इस बात को बयां कर रहे हैं कि प्रदेश सरकार की शादी अनुदान योजना गरीबों के लिए वास्तव में कितनी सहायक है। यह साल खत्म होने को है लेकिन पिछड़ा कल्याण विभाग में शादी अनुदान के लिए आवेदन करने वाले किसी आवेदक को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया, कारण कि शासन ने अभी तक बजट ही नहीं भेजा।
सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ उन गरीबों को नहीं मिल पाता, जिन्हें इनकी ज्यादा जरूरत है। कुछ ऐसा ही हाल है शादी अनुदान योजना का। इस योजना के तहत पिछड़ा वर्ग के आवेदन करने वालों ने तहसील से लेकर विभिन्न कार्यालयों तक दौड़ लगाई लेकिन उन्हें शादी अनुदान की धनराशि नहीं मिली। जिला पिछड़ा कल्याण वर्ग अधिकारी कन्हैया यादव ने बताया कि अब तक शासन से बजट नहीं मिला। इस कारण से आवेदकों को शादी अनुदान की धनराशि नहीं दी जा सकी। हालांकि सामान्य जाति के अल्पसंख्यकों को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से अनुदान दिया जा रहा है।
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इनसेट
भ्रम के चलते परेशान होते हैं आवेदक
शादी अनुदान के लिए आवेदन के संबंध में सही जानकारी न होने के चलते अल्पसंख्यक समुदाय के आवेदकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में अल्पसंख्यक के ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी भी आवेदन कर देते हैं, जबकि इन्हें पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के दफ्तर में आवेदन करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अल्पसंख्यक विभाग के उनके आवेदन पिछड़ा कल्याण विभाग में भेजे जाते हैं, जिससे प्रक्रिया संपन्न होने में देर लगती है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बिनोद कुमार जायसवाल ने बताया कि उनके कार्यालय से अल्पसंख्यक समुदाय के सामान्य वर्ग को ही शादी अनुदान दिया जाता है। बताया कि इस साल शादी अनुदान मद में 19 लाख रुपये का बजट मिला है। अब तक आठ आवेदकों अनुदान की धनराशि 10-10 हजार रुपये दी जा चुकी है।