वाराणसी। सुगम यातायात के अलावा पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी ई-रिक्शे के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता न होने से उसके संचालन की राह में थोड़ी आसानी भले हुई हो लेकिन यह कई दुश्वारियां भी खड़ी कर सकता है। ई-रिक्शा से दुर्घटना होने पर उसके चालकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होंगे। दुर्घटना में अगर किसी यात्री की मौत हो जाती है तो इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत अभियोग दर्ज होगा। ऐसे मामलों में इन्हें सात से दस साल की सजा हो सकती है। कारण, मोटर व्हीकल एक्ट के दायरे में उनका नहीं आना है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत यदि ये वाहन आते तो दुर्घटना होने पर चालकों के खिलाफ 304 ए का अभियोग पंजीकृत होता है और इसके तहत अधिकतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान है।
शहर में फिलहाल तीन सौ ई-रिक्शे संचालित हो रहे हैं। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ई-रिक्शा पर रोक नहीं लगाने और 650 वॉट वाले बैटरी रिक्शा पर लाइसेंस की जरूरत नहीं होने की बात कहकर वाहवाही तो लूटी लेकिन उन्होंने उन नियमों को ख्याल नहीं किया, जिनकी वजह से ई-रिक्शा चलाने वालों का भविष्य चौपट हो सकता है। दिल्ली में ई-रिक्शा से एक व्यक्ति की मौत होने और हाईकोर्ट द्वारा यह पूछे जाने पर की किस नियमों के तहत यह संचालित हो रहे हैं, यहां भी ट्रैफिक पुलिस सजग हो गई है। नाबालिग चालकों की धरपकड़ में जुट गई है। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक यहां भी अब तक ई- रिक्शा से चार ऐसे मामले आए हैं, जिनमें साइकल सवार एवं पैदल चलने वाले घायल हुए लेकिन इनमें कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया। फिर भी इन रिक्शों के संचालन पर पूरी नजर रखी जा रही है।
अब तक एक भी आवेदन नहीं
भूतल परिवहन मंत्री ने कहा था कि ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नगर निगम और नगर पालिका परिषद में होगा। नगर निगम वाराणसी के राजस्व प्रभारी अविनाश कुमार की मानें तो अब तक इसके लिए एक भी आवेदन नहीं आया है जबकि पैडल रिक्शा चालक भी अपना रजिस्ट्रेशन कराते हैं।
डीएल न होने पर लागू नहीं होगा नियम
ई रिक्शा की स्पीड आटो जैसी भले हो लेकिन इनकी आजादी रिक्शे जैसी है। इन्हें न तो चालान की चिंता है और न ही ट्रैफिक नियमों की। चार सवारी बैठाना चाहिए लेकिन छह से आठ सवारियां बैठा रहे हैं। ऐसे में यात्रियों की जान सांसत में पड़ सकती है। डीएल एवं रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर इन पर आरटीओ के नियम-प्रावधान लागू नहीं होंगे। अगर ये इन नियम-प्रावधानों के तहत आते तो किसी दुर्घटना की स्थिति में इन्हें अधिकतम सजा भी सिर्फ दो साल की होती।
कोट:
ई-रिक्शा से टक्कर लगने पर किसी की मौत होने की स्थिति में डीएल न होने पर चालक के खिलाफ धारा 304 आईपीसी का अभियोग पंजीकृत कराकर कार्रवाई होगी। ई रिक्शा यदि नाबालिग चलाते पाएं जाएंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- त्रिभुवन सिंह, एसएपी ट्रैफिक