वाराणसी। सकलडीहा से निर्दल विधायक सुशील सिंह ने कहा कि सांसद बनने की चाहत में अपने सगे भाई की मौत का सौदा करना ठीक नहीं है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया कि इससे ‘विधायक जी’ की बौखलाहट साफ झलकती है। उन्हें लगा कि कहीं उनकी जमानत न जब्त हो जाए इसलिए बौखलाहट में अपने फायदे के लिए यह सौदा कर लिया। वहीं, पूर्वांचल में आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के राजनीति में आने से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा, ‘मुकदमे तो तमाम नेताओं पर हैं। महत्वपूर्ण यह है कि मुकदमे किस श्रेणी के हैं। मैं छोटा था तभी मेरे बाबा की हत्या कर दी गई। मैं भी क्षत्रिय का बेटा हूं। कोई मेरा एक हाथ काटेगा तो उसके दोनों हाथ काट लूंगा।’
कैंटोमेंट स्थित एक होटल में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुशील सिंह ने कहा कि उनका पूरा समर्थन भाजपा को है। कागजी तौर पर सदस्यता इसलिए नहीं ली क्योंकि इससे उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी। कहा कि चंदौली से निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था लेकिन लगा कि मेरे लड़ने से भाजपा प्रत्याशी को नुकसान होगा। मोदी के नेतृत्व में मुझे विश्वास है, इसलिए पीछे हट गया। उन्होंने कहा कि अंसारी बंधुओं ने खुद आगे बढ़ने के लिए समाज पर अत्याचार किया है। सपा सरकार में मऊ में दंगे हुए और दंगों के दौरान मुख्तार अंसारी खुली जीप में घूम रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यही लोग दंगे कराते हैं। पिछली बार मुख्तार बनारस से प्रत्याशी थे लेकिन यहां की जनता ने उन्हें नकार दिया। सुशील ने दावा किया कि इनके कहने से मुस्लिम मतदाताओं पर कोई असर नहीं होने वाला है। लोग समझदार हैं, सोच-समझकर वोट देंगे।