वाराणसी। वरुणा नदी में पानी का दबाव बढ़ जाने से सरैंया स्थित पुराना पुल का एक फाटक शुक्रवार की सुबह अचानक टूट गया। इसके चलते दो मछुआरे तेज प्रवाह में बह गए लेकिन कुछ दूर बाद तैरकर निकलने में सफल हो गए। जबकि सराय मोहाना पर बने लकड़ी का पुल पानी की तेज धारा में बह गया, जिससे करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क शहर से संपर्क टूट गया। फाटक टूटने का कारण वरुणा में नहर से पानी का छोड़ा जाना बताया जा रहा है।
सिंचाई की दृष्टि से वरुणा के पानी को रोकने के लिए पुराना पुल के नीचे सात फाटकों लगाए गए हैं। सुबह साढ़े नौ बजे फाटक संख्या तीन अचानक टूट गया। पानी का बहाव अचानक तेज हो जाने से घाट पर मछली मार रहे दो युवक बहने लगे। दोनों तैरना जानते थे, इसलिए वे कुछ दूर जाने के बाद किसी तरह दोनों निकलने में सफल हो गए। पुल पर तैनात चौकीदार बाबूलाल ने तत्काल घटना की जानकारी अधिकारियों को दी। कुछ देर बाद सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। अधिशासी अभियंता का कहना था कि फाटक दुरुस्त कराने दस दिन लगेंगे।
वहीं, पानी की तेज धारा में सराय मोहाना में बना लकड़ी का पुल बह गया। ग्रामीणों ने नावें लगाकर पुल बनाने की कोशिश की लेकिन दो नावें बहकर गंगा की तरफ चली गईं। पुल टूटने से कोटवां, राजापुर, दांतेपुर, रमचंदीपुर, चांदपुर, सिवार, रैपुरा, कमौली, मुस्तफाबाद, गौरा समेत एक दर्जन गांवों का शहर से संपर्क टूट गया। इन गांवों के लोग इसी पुल से फूल, माला और सब्जियां लेकर शहर में बेचने के लिए आते थे। अब ग्रामीणों को 12 किमी का चक्कर लगाकर शहर आना पड़ेगा। सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का कहना था कि वरुणा का जहरीला पानी गंगा में गिर रहा है। इसलिए प्रदेश के एक मंत्री ने वरुणा के पानी को साफ करने के लिए ज्ञानपुर प्रखंड नहर से पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। एक सप्ताह पूर्व नहर से पानी छोड़ने के कारण वरुणा में दबाव बढ़े दबाव के कारण जर्जर फाटक टूट गया। फाटक टूटने से पहले वरुणा में पानी का लेबल साढ़े 14 फुट था। फाटक टूटने की जानकारी मिलने पर लोगों की भीड़ पुल पर इकट्ठा हो गई थी।