वाराणसी। मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों के मामले में यूपी नंबर वन है। 1993 से 2013 तक आयोग के पास देशभर से14 लाख शिकायतें आई हैं। इनमें से सात लाख शिकायतें केवल उत्तर प्रदेश से हैं। कुल 14 लाख शिकायतों में से आयोग के पास अभी 22 हजार लंबित हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के ज्वाइंट रजिस्ट्रार एके पाराशर ने सोमवार को यहां प्रेसवार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि यूपी के लोग अन्य राज्यों की अपेक्षा मानवाधिकारों के प्रति ज्यादा जागरूक हैं, इसलिए शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गत 20 वर्षों में पुलिस ने मानवाधिकार से जुड़ी एक भी शिकायत नहीं की है। बताया कि एनकाउंटर के लिए 12 मई 2010 को आयोग ने गाइडलाइन जारी की थी। इसके बाद से एनकाउंटर की घटनाओं में कमी आई है। साथ ही इस प्रकार के मामलों में 24 घंटे के भीतर आयोग के पास सूचना पहुंच जाती है।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों के साथ अत्याचार पर आयोग के निर्देश पर पूर्व आईएएस अधिकारी केबी सक्सेना ने रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें 150 सुझाव दिए गए हैं। इनमें से एक सुझाव राज्यों में जाकर जन सुनवाई करने का है। आयोग पांच जन सुनवाई उड़ीसा, गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र में कर चुका है। यूपी में दो जगहों पर जन सुनवाई होनी थी। 11-12 नवंबर को मेरठ में प्रस्तावित जन सुनवाई आयोग के दफ्तर में हो चुकी है। मंगलवार और बुधवार को यहां मंडलायुक्त सभागार में जन सुनवाई होगी। वाराणसी मंडल में 123 शिकायतें मिली हैं। ये पुलिस उत्पीड़न से लेकर अवैध कब्जे आदि से जुड़ी हुई हैं। जन सुनवाई के दौरान भी आम आदमी आयोग से शिकायत कर सकता है। पहले दिन जस्टिस डी मुरुगेशन और जस्टिस एससी सिन्हा की पीठ 45-45 मामलों की जन सुनवाई करेगी।