वाराणसी। शहर के प्राइवेट अस्पताल नगर निगम को लाखों के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। बात करें आंकड़ों की तो यह बकाया 50 लाख से अधिक है। शहरी क्षेत्र में बने 996 अस्पतालों ने पांच साल से नगर निगम को लाइसेंस शुल्क के मद में कोई शुल्क जमा नहीं किया है। दो हजार रुपये से लेकर दस हजार तक लगने वाले इस लाइसेंस शुल्क को पांच सालों से प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी सेंटरों ने जमा नहीं किया है। अब निगम ने शुल्क वसूली के लिए जुर्माना राशि पांच हजार से घटाकर पांच सौ रुपये सालाना कर दिया है।
नगर निगम ने शहरी क्षेत्र के अस्पतालों से लाइसेंस शुल्क वसूलने के लिए प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। दो माह पहले निगम प्रशासन ने शहरी क्षेत्र के 15 हजार प्रतिष्ठानों को नोटिस देते हुए नगर आयुक्त के साथ बैठक की। बावजूद इसके प्राइवेट अस्पताल निगम के लाइसेंस शुल्क भरने में आनाकानी कर रहे हैं। नगर निगम के कंप्यूटर कोआर्डिनेटर संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इन प्राईवेट अस्पतालों के लाइसेंस शुल्क को जमा कराने के लिए आईएमए अध्यक्ष डॉ. भानू शंकर पांडेय ने पहल की है। इसके लिए 8, 9 और 10 अप्रैल को चेतगंज के आईएमए भवन में एक शिविर लगाया जाएगा। शिविर में एक अप्रैल 2014 से लेकर 2019-20 के लाइसेंस शुल्क जमा कराए जाएंगे। उन्होंने आईएमए अध्यक्ष के इस पहल की सराहना की है। बताया कि इन प्राईवेट अस्पतालों से अब 500 रुपये सालाना जुर्माना के हिसाब से लाइसेंस शुल्क वसूल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले यह जुर्माना राशि पांच हजार रुपये थी लेकिन उसे कम करते हुए पांच सौ रुपये की गई है।