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अनवरत चलेगी अब शास्त्रार्थ की परंपरा : कुलपति

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वाराणसी। शास्त्रार्थ सम्मेलन की परंपरा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फिर से शुरू हो चुकी है। यह परंपरा अब अनवरत चलती रहेगी। इस तरह के प्रयोजन से नई खोज और नई सोच का जन्म होता है। उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने व्यक्त किए। वह रविवार को वाग्देवी मंदिर में व्याकरण न्याय-वेदांत मीमांसादय विषय पर आयोजित अखिल भारतीय संस्कृत शास्त्रार्थ सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे।
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शास्त्रार्थ सम्मेलन में विद्वानों ने व्याकरण, न्याय और वेदांत मीमांसा पर अपने विचार व्यक्त किए। बेंगलूरू से आया आठ वर्षीय बटुक सात्विक जालिहाल हर किसी के आकर्षण का केंद्र रहा। दरभंगा से प्रो. सुरेश झा, प्रो. विद्देश्वर झा, चिन्मय विश्वविद्यालय केरल से डॉ. रामकृष्ण पेजताय, नागेंद्र समेत कई विद्वानों ने विचार व्यक्त किए। शास्त्रार्थ के अंत में सभी प्रतियोगियों को प्रमाणपत्र वितरित दिए गए। सम्मेलन के संयोजक वेदांत विभाग के आचार्य प्रो. राम किशोर त्रिपाठी, सहसंयोजक डॉ. दिनेश कुमार गर्ग रहे।
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