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महिला सशक्तीकरण का प्रतीक है काशी

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वाराणसी। बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि काशी अनादि काल से महिला सशक्तीकरण का प्रतीक है। इस दौरान उन्होंने गंगा, अहिल्याबाई होलकर और मणिकर्णिका यानी रानी लक्ष्मीबाई को नमन किया।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी में जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी गंगा हैं। गंगा को धारण करने वाले महादेव यहां हैं। अहिल्याबाई होलकर ने बाबा विश्वनाथ का मंदिर बनवाया। इसी काशी ने देश को मणिकर्णिका दी, जो आगे चलकर रानी लक्ष्मीबाई बनीं और अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई लड़ कर इतिहास में अमर हो गईं। इस तरह से काशी सैकड़ों वर्षों से महिला सशक्तीकरण की मुहिम को धार दिए हुए है।
सभी बहनें और कुछ-कुछ भाइयों पर लगा ठहाका
दीनदयाल हस्तकला संकुल स्थित आडिटोरियम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से ठसाठस भरा हुआ था और पुरुषों की संख्या नाममात्र थी। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि यहां उपस्थित सभी बहनें और कुछ-कुछ भाई...। इतना कह कर प्रधानमंत्री मुस्कुराए तो सभास्थल पर मौजूद लोगों ने ताली बजाते हुए ठहाके लगाए।
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भारत माता की जय के तीन जयकारे लगवाए
प्रधानमंत्री ने संबोधन की शुरुआत में भारत माता की जय के तीन जयकारे लगवाए। पराक्रमी भारत के लिए भारत माता की जय...। विजयी भारत के लिए भारत माता की जय...। वीर जवानों के लिए भारत माता की जय...। कहा कि आपकी यह जय-जयकार और आशीर्वाद देश की सीमा पर तैनात जवानों का उत्साह बढ़ाएगा। इसके साथ ही अंत में भारत माता और भारत की नारी की जय का जयकारा तीन-तीन बार लगवा कर प्रधानमंत्री ने अपना संबोधन खत्म किया।
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