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मुल्क में अमन के लिए दुआएं मांगी

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भदोही। मुकद्दस रमजान के दूसरे अशरे 12वीं रमजान को आलमपुर नई मस्जिद में हाफिज रईस अहमद ने तरावीह मुकम्मल की। जैसे ही तरावीह मुकम्मल हुई मौजूद नमाजियों ने हाफिज का इस्तकबाल किया। हाफिज ने बारगाहे परवरदिगार में हाथ फैला कर मुल्क की तरक्की और अमन के लिए दुआएं खैर की। हाफिज ने कहा कि कहा, ऐ अल्लाह इस मुकद्दस महीने के सदके में जो परेशान हैं उन पर अपनी रहमतों की बारिश फरमा। जो बीमार है उन्हें शिफा दे। जो बे औलाद हैं उन्हें नेक औलाद अता कर। जो नमाज नहीं पढ़ते उन्हें नमाज पढ़ने की तौफीक दे।
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इस मौके पर सलातो सलाम का नजरान-ए-अक़ीदत पेश किया गया। हाफिज ने लोगों को बताया कि कुरआन पढ़ें और समझें। कुरआन में जिंदगी की हर परेशानी का हल है। हमें जीने का सलीका सिखाता है। इस्तकबाल करने वालों में हाजी शाहिद हुसैन, आबिद हुसैन, हाफिज नौशाद, इस्लाम मंसूरी, नुरुल हसन, हाजी आजाद खां, गुलाम रसूल, नदीम अंसारी, ताहिर अंसारी, गफ्फार अहमद, इबरार अंसारी आदि रहे। दरोपुर पुरानी मस्जिद इसी मोहल्ले के नूरी मस्जिद में भी बीती रात तरावीह मुकम्मल हुई। नूरी मस्जिद में हाफिज अनस व दरोपुर पुरानी मस्जिद में हाफिज अकरम ने तरावीह पढ़ाई। मौजूद लोगों ने दोनो हाफिजों को फूलों की माला पहना कर खैरमकदम किया। इस मौके पर मौ. फैसल अशरफी, हाजी मुश्ताक अहमद, इनायत हसन, मकसूद आलम, इकबाल अहमद, अब्दुल हक, मंसूर आलम, इरफान अंसारी, अश्फाक अंसारी, एहसान अंसारी, इम्तीयाज अंसारी, नईम हसन, जावेद अंसारी, आरिफ अंसारी, शाहआलम अत्तारी, इरशाद अंसारी, तौसीफ मालिक, वसीम अंसारी, इकराम सईद, आजम अंसारी, अरशद अंसारी आदि रहे।
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