वाराणसी। ‘कर्दमेश्वर देवेसा, काशीवास जनप्रिय:, आज्ञा देहि महादेव:। पुर्नदर्श नमोस्तुते...’ की स्तुति के साथ पंचक्रोशी तीर्थयात्रियों ने भगवान शिव से आज्ञा ली और पहले पड़ाव कंदवा से दूसरे पड़ाव भीमचंडी के लिए प्रस्थान कर गए। भीमचंडी पंचक्रोशी तीर्थ पथ का इकलौता शक्तिपीठ है। मां भीमचंडी यहां मां विंध्यवासिनी की बहन के रूप में प्रतिष्ठित हैं। मान्यता है कि भीमचंडी देवी के दर्शन मात्र से राज्य ऋण से मुक्ति मिल जाती है।
कर्दमेश्वर महादेव से शक्तिस्वरूपा मां भीमचंडी के दर्शन के लिए पहुंचे तीर्थयात्रियों ने उन्हें नारियल-चुनरी चढ़ाकर अपनी अरज-गरज लगाई।
घंटाशूलहलानि शंखमुसले चक्रं धनु: सायकं हस्ताब्जैर्दघतीं धनान्तविलसच्छीतांशु तुल्यप्रभाम्। गौरीदेहसमुद्भवा त्रिनयनामांधारभूतां महापूर्वामत्र सरस्वती मनुमजे शुम्भादि दैत्यार्दिनीम... की स्तुति के साथ घंटा-घड़ियाल बजाकर सुख, स्वास्थ्य, समृद्ध की मंगलकामना की। इससे पहले यहां गंधर्वों द्वारा स्थापित गंधर्व तालाब में स्नान के बाद दान पुण्य किया। फिर दर्शन-पूजन के बाद भोजन की तैयारी की। इसके बाद यहां की धर्मशालाओं में कहीं भजन-कीर्तन की गूंज तो कहीं देवी स्तुति और मानस पाठ के स्वर गुंजायमान होने लगे। इस दौरान गांव के लोग भी तीर्थयात्रियों की सेवा में लगे रहे। रात्रिवास के बाद तीर्थयात्री अगले यानी तीसरे पड़ाव रामेश्वर के लिए भैरवतालाब होते हुए निकलेंगे। मंदिर की पुजारी बिंदेश्वरी मिश्रा ने बताया कि देवी तीन प्रहर में तीन स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देती हैं। यह विंध्याचल देवी की बहन हैं। मां भीमचंडी के दर्शन-पूजन से तीर्थयात्रियों को राज्य ऋण से मुक्ति मिलती है। यहां पर इच्छित भोजन चावल, दाल, रोटी और सब्जी ग्रहण किया जाता है। इस स्थान पर रात्रिवास का बहुत महत्व है।
गंधर्वों ने स्थापित किया है मां भीमचंडी का स्वरूप
पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग का एक मात्र देवी मंदिर मां भीमचंडी हैं। यह मंदिर गंधर्वों ने स्थापित किया है। रवि रक्ताक्ष गंधर्व ने यहां तालाब का निर्माण कराया था। भीमचंडी गांव में मां भीमचंडी मंदिर की तरफ बढ़ते ही गंधर्वतीर्थ तालाब पड़ता है, जहां स्नान का अपना माहात्म्य है। इस कुंड के पूर्व दक्षिणी कोने पर नरकार्णावतार शिव गण का मंदिर स्थापित है। इसके आगे बढ़ने पर गंधर्वेश्वर का मंदिर है। इस मंदिर के दक्षिण तरफ कुआं भीमचंडी शक्ति तीर्थ है। इससे आगे भीमचंडी विनायक का मंदिर है। मान्यता के अनुसार इनके दर्शन से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और कष्ट दूर हो जाते हैं। इसी मंदिर से सटा हुआ गंधर्व का मंदिर है। इसी क्रम में भीमचंडेश्वर और इसके दक्षिण में भीमचंडी देवी का मंदिर है।