वाराणसी। उन्नाव और कठुआ की घटना के विरोध में शुक्रवार को काशी की महिलाएं, युवतियां सड़क पर थीं। एक ओर विरोध में काले परिधान, हाथों व आंखों पर काली पट्टियां बांध महिलाओं, युवतियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों ने शर्मिंदा मार्च निकाला। दूसरी ओर बीएचयू की महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने भी कैंडल मार्च निकालकर यौन हिंसा की शिकार पीड़ितों के लिए न्याय मांगा। आईआईटी बीएचयू के भी छात्र-छात्राओं ने भी अपने कैंपस में कैंडल मार्च निकाला और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
साझा संस्कृति मंच से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, छात्र-छात्राओं, रंगकर्मियों ने लहुराबीर स्थित चंद्रशेखर आजार पर विरोध सभा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज देश की स्थिति आधी आबादी के रहने लायक नहीं रही। कठुआ और उन्नाव की शर्मनाक घटनाओं के आरोपियों को सत्ता का संरक्षण मिलने पर उन्होंने रोष भी जताया। सभा के बाद लोगों ने स्लोगन लिखी तख्तियों के साथ मैदागिन तक शर्मिंदा मार्च निकाला। संदेश दिया कि कठुआ, उन्नाव, बारपेट, बिहार जैसी घटनाओं पर हम शर्मिंदा हैं। मार्च में जागृति राही, श्रुति नागवंशी, डॉ. इंदु पांडेय, रंजू सिंह, किरण गुप्ता, डॉ. आनंद प्रकाश, वल्लभ पांडेय, रूपेश पांडेय, डॉ. मो. आरिफ, राजेश सरोज, डॉ. अनूप श्रमिक समेत काफी संख्या में लोग शामिल रहे।
उधर, स्टूडेंट्स फॉर चेंज के बैनर तले आईआईटी बीएचयू के लिंबडी चौराहे से कैंडल मार्च निकाला। मार्च यहां से शुरू होकर छात्रावास मार्ग से होकर पुन: लिंबड़ी चौराहे पर आकर समाप्त हुआ। यहां सभा हुई जिसमें छात्र-छात्राओं ने न्याय व्यवस्था व लोकतंत्र पर सवाल खड़े किए। नेतृत्व अध्यक्ष स्वाति और उपाध्यक्ष सूरज ने किया। इसी तरह महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने एमएमवी तिराहे से लेकर सिंह द्वार और फिर रविदास गेट तक मार्च निकाला।