बाबतपुर। कोइराजपुर में गांव में रहने वाले वनवासियों को अपने घर से बेदखल करने के मामले में प्रशासन की नींद खुल गई है। डीएम को शिकायती पत्र भेजे जाने के बाद तहसील प्रशासन में खलबली है। माना जा रहा है कि जमीन को इधर-उधर करने में यहां के पूर्व अधिकारियों-कर्मचारियों का हाथ है। एसडीएम पिंडरा ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। एसडीएम एनएन यादव ने कहा कि 26 जनवरी के बाद पुलिस, चकबंदी, राजस्व विभाग के कर्मचारियों की टीम गठित कर संयुक्त जांच कराई जाएगी।
वनवासियों ने डीएम से शिकायत की थी कि वह आबादी की जमीन पर पांच पीढ़ियों से रह रहे थे। पूर्व प्रधान ने उन्हें इसी जमीन पर इंदिरा आवास दिए थे। आरोप लगाया है कि गाजीपुर से आए एक बाबा ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। बीते सात वर्षों से वनवासियों को जमीन से हटाया गया है। उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास का निर्माण कराया जा रहा है। वनवासियों की मानें तो उन्होंने इसके पहले भी कई अधिकारियों से शिकायत की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मामले में पूर्व प्रधान और मौजूदा प्रधानों के बयान से लगता है कि वे इस पर बोलने से बचना चाहते हैं। तीन विभागों की जांच टीम जांच कर ही पता करेगी कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है? वनवासियों इस जमीन पर इंदिरा आवास बनाकर क्यों दिए गए थे? क्या इस जमीन और सरकारी धन से बनाए गए आवासों को बेचने का नियम है? वनवासियों और बाबा में कोई समझौता हुआ था? अगर हां तो उस समझौते की वैधता है?