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पुलिस, आरटीओ और खनन विभाग की तिकड़ी ने किया खेल

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वाराणसी। पुलिस, आरटीओ और खनन विभाग की मिलीभगत से रमचंदीपुर में अवैध खनन होता रहा और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे रहे। पूरे दिन बालू लदे ओवरलोड ट्रक बालू लेकर विभिन्न रास्तों से गुजरते रहे लेकिन उनके खिलाफ पुलिस और परिवहन विभाग में से किसी ने कार्रवाई नहीं की। इस दौरान कार्रवाई के नाम पर केवल दो ट्रैक्टर का चालान किया गया।
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यही नहीं, इससे पहले चार महीने में अवैध खनन में संलिप्त एक भी वाहन को सीज नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि ठेकेदारों ने अनुमति से कहीं ज्यादा खनन कर डाला। डीएम योगेश्वर राम मिश्र के निर्देश पर अधिकारी जांच करने गए तो उन्होंने भी ओवरलोड वाहनों की अनदेखी की। यही कारण है कि तीनों विभागों के अधिकारियों ने एक तरह की ही रिपोर्ट डीएम को दी है, जबकि इनके एक वरिष्ठ अधिकारी ने इनसे उलट रिपोर्ट दी है। अब इन तीन अधिकारियों की संयुक्त जांच रिपोर्ट संदेह के घेरे में है। मामले में आगे की जांच के लिए आने वाली खनिज निदेशालय की टीम पुलिस, आरटीओ और खनन विभाग के अधिकारियों से उनकी रिपोर्ट को लेकर पूछताछ कर सकती है।
रमचंदीपुर में अवैध खनन की शिकायत पर डीएम ने 22 दिसंबर को सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ पिंडरा सुरेंद्रनाथ यादव, एआरटीओ प्रवर्तन राजीव कुमार और जिला खनन अधिकारी अनिल कुमार सिंह को संयुक्त जांच दी थी। जांच मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ पिंडरा ने संयुक्त निरीक्षण किया। बाद में 28 दिसंबर को खनन अधिकारी और एआरटीओ ने एक साथ निरीक्षण किया। सूत्रों की मानें तो खनन अधिकारी और एआरटीओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निरीक्षण के दिन उन्होंने बलुआ घाट से चंद्रा चौराहे तक निरीक्षण किया लेकिन ओवरलोड वाहन नहीं मिला। अंडरलोेड वाहनों की जांच करने पर पता चला कि उन सभी के पास एमएम-11 प्रपत्र (रवन्ना) था। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि 2011 के बाद से वाराणसी में कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। इसके बाद भी चोरी छिपे इलाकों में अवैध खनन होता रहा। अब जबकि रमचंदीपुर में प्रशासन ने खनन का पट्टा दिया है तो अवैध खनन करने वाले लोग अलग-अलग नामों से शिकायत करवा रहे हैं। पूर्व से अवैध खनन में संलिप्त लोग नहीं चाहते कि यहां वैध खनन भी चले।
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वहीं सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ पिंडरा की रिपोर्ट में खनन में मानकों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाते हुए उसे सवालों के घेरे में खड़ा किया गया है। सूत्रों की मानें तो सीओ पिंडरा सुरेंद्रनाथ यादव सिटी मजिस्ट्रेट के साथ निरीक्षण करने गए थे। सिटी मजिस्ट्रेट के साथ उन्होंने संयुक्त रिपोर्ट दी। वहीं डीएम को खनन अधिकारी, एआरटीओ और सीओ पिंडरा की ओर से एक रिपोर्ट दी गई है। दोनों रिपोर्ट में सीओ पिंडरा शामिल रहे हैं।

अब जिम्मेदारी से बच रहे जांच अधिकारी
जांच प्रक्रिया से जुड़े परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वह केवल ओवरलोड वाहनों की जांच करने गए थे। दो ओवरलोड ट्रैक्टर का चालान किया गया। खनन की जांच राजस्व और खनन विभाग को करनी थी। वहीं पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच में जो पाया गया, उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।

दोनों टीमों ने माना, प्रपत्रों में हुई हेराफेरी
सिटी मजिस्ट्रेट-सीओ पिंडरा और खनन अधिकारी-एआरटीओ की टीमों ने एमएमए-11 प्रपत्र (रवन्ना) में हेराफेरी पाई है। खनन अधिकारी-एआरटीओ ने जांच में कहा है कि कई रवन्ना ऐसे थे, जिनका बार कोड में हेराफारी कर इसका दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। आशंका जताई कि इसमें ट्रांसपोर्ट के लोग ऐसा कर सकते हैं। ये एक अलग तरह की जांच है।

पुलिस 72 दिन बाद भी चिह्नित नहीं कर पाई खनन माफिया
- तारापुर टिकरी में अवैध खनन का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। तारापुर टिकरी में अवैध खनन करने वालों को पुलिस मुकदमा दर्ज करने के 72 दिन बाद भी चिह्नित नहीं कर पाई है। जिला खनन अधिकारी ने 26 अक्तूबर को लंका थाने में खनन माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
लंका थाना क्षेत्र के तारापुर टिकरी में करीब तीन महीने पूर्व जेसीबी और ट्रक के सहारे खनन माफिया लंका पुलिस के मिलीभगत अवैध खनन कर रहे थे। टिकरी और तारापुर के ग्राम प्रधानों ने ग्रामीणों के साथ टिकरी त्रिमुहानी पर दस दिन धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद जिला खनन अधिकारी ने तारापुर टिकरी के खनन माफिया के खिलाफ लंका थाने में अवैध खनन करने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। टिकरी के ग्राम प्रधान सुशील कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री के कार्यालय ग्रामीणों के साथ पहुंचकर विरोध प्रदर्शन कर खनन माफिया और खनन अधिकारी और खनन में लिप्त पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
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