वाराणसी। बाबा विश्वनाथ के डेढ़सी पुल प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण के पखवारे भर बाद ही आदि गुरु शंकराचार्य प्रतिमा की छतरी टेढ़ी हो गई है। द्वार के शीर्ष पर लगी शंकराचार्य प्रतिमा की छतरी टूटकर किसी भी समय गिर सकती है। लाखों रुपये की लागत से इस द्वार का जीर्णोद्धार/सौंदर्यीकरण कराने के साथ ही वहां शंकराचार्य की प्रतिमा लगाई गई थी। इस द्वार का सौंदर्यीकरण पर्यटन विभाग ने करवाया था जबकि आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पंचदशनाम छात्र साधु परिषद ने करवायी है।
आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के ऊपर लगी पीतल की छतरी कब और कैसे टेढ़ी हुई, इसकी जानकारी फिलहाल आसपास के लोगों को नहीं है। अगस्त्यकुंडा निवासी गीतकार कन्हैया दुबे केडी ने रविवार की रात को आदि शंकराचार्य की छतरी टेढ़ी देखने के बाद इसकी जानकारी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन को दी। अफसरों का कहना है कि छतरी कैसे टेढ़ी हुई, इसका पता लगाया जा रहा है। माना जा रहा है कि बंदरों की उछल कूद के दौरान किसी तरह छतरी टेढ़ी हुई होगी। उल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष तक चले काम के बाद बाबा के डेढ़सी पुल प्रवेश द्वार का जीर्णोद्धार बीते महीने पूरा कराया गया था। शारदीय नवरात्र प्रतिपदा के दिन 29 सितंबर को डेढ़सी पुल द्वार पर आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद सरस्वती और मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने किया था।