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मणिपुरी नृत्य में भावों-इशारों का बेजोड़ समन्वय

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वाराणसी। कोमलता और मृदुता से भरी पदचापों, भौंहो के इशारों के साथ रविवार की रात मणिपुरी नृत्य से कलाकारों ने संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। बांहों और उंगलियों के लोचदार प्रवाह हर किसी के अंतरमन को छू गए। राधा-कृष्ण के महारास पर आधारित मणिपुरी नृत्य में कलाकारों की भाव-भंगिमाएं यादगार बन गईं। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के पं. ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में इस दो दिवसीय नृत्य की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू मणिपुर सांड एकेडमी इंफाल और संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के अलावा नृत्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुई।
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दीप प्रज्ज्वलन के बाद मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया गया। बतौर मुख्य अतिथि पद्मभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र ने संगीत की शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों को सभी प्रांतों की सांस्कृतिक विरासतों के बारे में जानने को एक सार्थक कदम बताया। जोशी रानी देवी, श्वेतोंबी चानू, ए मोमिया देवी, एम मौमोया सिंह, ए ललित सिंह, जुतिना, थांग दुगार्ड ने देवताओं को पूजा से प्रसन्न करने पर आधारित नृत्य लाई-हरोबा से नृत्य की शुरूआत की। इसके बाद मार्शल आर्ट(थांग टा) के माध्यम से नृत्य पेश कर वाहवाही बटोरी। मणिपुरी संस्कृति का प्रसिद्ध वादन ढोल, चोलम, नृत्य काबुई, पुंग चोलम के बाद वसंत रास की प्रस्तुति से कलाकारों ने मन मोहा। राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों पर भी मोहक नृत्य पेश किया गया। ढोल पर एल कला सिंह, चोलम पर लाखपति सिंह, पुंग चोलम पर एल श्याम सेन सिंह, एल विद्या देवी ने संगत की। नरेंद्र मिश्र ने ध्वनि-प्रकाश सज्जा की। नृत्य विभागाध्यक्ष डॉ. विधि नागर की देखरेख में हुए कार्यक्रम में जवाहर लाल नेहरू मणिपुरी डांस एकेडमी इंफाल के उपेंद्र नाथ शर्मा ने युवाओं से परंपरा को बचाए रखने और उसके बारे में जानने की अपील की।
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