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अस्पतालों पर 70 लाख बकाया

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अस्पतालों पर 70 लाख बकाया
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वाराणसी। सरकारी अस्पतालों मेें भुगतान लटकाए रखने का खेल कोई नया नहीं। मरीजों से जुड़ी सेवाओं के भुगतान भी समय पर नहीं होते। गोरखपुर में बकाए का भुगतान न होने पर ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने से 30 नौनिहालों की मौत के बाद जब यहां लंबित भुगतानों की पड़ताल की गई तो कुछ वैसी ही कहानी सामने आई। हालांकि यहां बकाए के मद अलग हैं लेकिन लंबी दौड़भाग के बाद भी भुगतान न होने की मशक्कत कमोबेश एकजैसी ही है। मरीजों के नाश्ता-भोजन, एंबुलेंस, जेनरेटर के डीजल और दवाओं के करीब 70 लाख रुपये बकाए की फाइल महीनों से लटकी है। सबसे अधिक भोजन मद में 40 लाख बकाया है।
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102 और 108 एंबुलेंस जैसी सेवाओं के लिए समुचित बजट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बिजली कटने पर अस्पतालों में जेनरेटर चलाने के लिए मंगाए गए डीजल का तकरीबन 15 लाख बकाया है। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, जिला महिला अस्पताल, दीनदयाल, रामनगर अस्पताल में हर दिन दो हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं जबकि भर्ती मरीजों की संख्या औसतन 500 होती है। भर्ती मरीजों को हर दिन दो समय भोजन और नाश्ता देने की व्यवस्था शासन ने दी है लेकिन यहां जिम्मेदारी संभालने वाली फर्म का अप्रैल से जुलाई माह तक का करीब 40 लाख रुपये बकाया है। सरकारी व्यवस्था के तहत निर्धारित कंपनियां तय रेट पर दवाएं आपूर्ति करती हैं और उसका भुगतान अस्पतालों की ओर से किया जाता है। इस मद का भी 15 लाख रुपये बाकी है। महीनों से लंबित भुगतान पर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन से पत्राचार किया गया है, जब बजट आएगा तब भुगतान कर दिया जाएगा।
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किस मद में कितना बकाया
नाश्ता-भोजन 40 लाख
डीजल 15 लाख
दवा खरीद 15 लाख
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