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आरती स्थल पर गंगा, अहिल्याबाई घाट की जेटी बही

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वाराणसी। टोंस, चंबल और अन्य सहायक नदियों से आई जलराशि के चलते गंगा गुरुवार की शाम उफनाने लगी। अचानक प्रवाह में तेजी आने से अहिल्याबाई घाट पर लगाई गई जेटी टूट कर बह गई। इसके साथ ही कई नावें भी बहने लगीं और मल्लाहों में हड़कंप मच गया। शाम को गंगा आरती स्थल पर पहुंच गई। करीब 60 घाटों का एक दूसरे से संपर्क अबतक टूट चुका है। रात 10 बजे गंगा का जलस्तर 63.76 मीटर पर पहुंच गया। गंगा में प्रवाह बढ़ने से सहायक नदी वरुणा के तटीय इलाकों में हलचल पैदा हो गई है। इसी रफ्तार से गंगा बढ़ती रही तो अगले 24 घंटे में वरुणा किनारे की बस्तियों में पानी घुसने लगेगा। इससे करघों के कुटीर उद्योग पर भी असर पड़ सकता है।
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गंगा के जलस्तर में तेज बढ़ाव शुरू हो गया है। गुरुवार की शाम गंगा चार सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ने लगी। इससे तटीय इलाकों में लोगों के माथे पर चिंता की सलवटें पड़ गई हैं। शाम छह बजे तक आरती स्थल पर गंगा पहुंच गई। इससे पुरोहितों आरती स्थल फिर बदलना पड़ा। शीतला घाट और दशाश्वमेध घाटों पर गंगा आरती ऊपरी सतह की सीढ़ियों पर हुई। देर रात दशाश्वमेध घाट के शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर में गंगा प्रवेश कर गई। शीतला घाट भी डूब गया। मढ़ियों के सभी मंदिर गंगा में विलीन हो गए। गंगा में जल प्रवाह की गति बढ़ने से अहिल्याबाई घाट पर लगी जेटी बह गई। इसके बाद अजय पिरामल ग्रुप के कर्मचारियों ने राजेंद्र प्रसाद घाट और अस्सी घाट पर लगी जेटी खुलवा ली। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सहायक नदियों से आ रहे लगातार पानी के चलत गंगा में बढ़ाव बना हुआ है। यही रफ्तार रही तो शुक्रवार की सुबह तक गंगा 64 मीटर के पार पहुंच जाएगा। खतरे का निशान 71.26 मीटर है। फिलहाल गंगा खतरे के निशान से 7.50 मीटर नीचे बह रही है।
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