फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गरीबों का सहारा बना बैतुलमाल

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञानपुर। इस्लाम में गरीबों, असहायों और बेसहारों की मदद के लिए जकात, फितरा और खैरात की व्यवस्था है। मदद के जरिए उन्हें परेशानी से राहत दिलाना है। लेकिन, सही जानकारी और मानीटरिंग न होने से इसका लाभ वाजिब व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता। लेकिन, इस्लाम की इस व्यवस्था को हकीकत में अंजाम दे रहा है जिले के माधोसिंह में बाराने रहमत कमेटी का बैतुल माल। बैतुल माल (सहायता कोष) गरीबों, बेसहारों, बीमारों और यतीमों के लिए मददगार साबित हो रहा है।
विज्ञापन

माधोसिंह गांव में डेढ़ दशक पहले गठित बाराने रहमत कमेटी विभिन्न पर्व पर जलसे, जुलूस समेत तमाम सामाजिक सरोकार वाले कार्यों को करती आई है। कमेटी ने पांच साल पूर्व एक बैठक में गरीब, यतीम, जरूरतमंद, गंभीर बीमारी से पीड़ितों, पढ़ने वाले गरीब बच्चों की मदद के लिए कोष बनाने पर विचार किया। इसके बाद फौरी तौर पर बैतुलमाल स्थापित कर दी गई। दो साल तक माधोसिंह, घोसिया समेत आसपास के लोगों ने रमजान में फितरा, जकात, खैरात, सदका समेत विभिन्न मद से बैतुलमाल में देने लगे। इससे गरीब लड़कियों की शादी, बीमारों की मदद, जरूरतमंदों को मदद दिया। दो साल की सफलता पर इसका हिसाब किताब रखा जाने लगा। बाराने रहमत कमेटी के वरिष्ठ सदस्य वाजिद अली ने बताया कि बैतुलमाल से अब तक 14 लड़कियों की शादी कराई जा चुकी है। 13 गंभीर बीमारियों से पीड़ितों की मदद की जा चुकी है। गरीब परिवार के मेधावी बच्चों को पढ़ाई में मदद की जाती है। बताया कि कमेटी मदद उसी को देती है,जो वास्तव में जरूरत मंद हो, इसकी छानबीन भी की जाती है। हर साल माहे रमजान में लोगों से जकात, फितरा, खैरात आदि की रकम बैतुल माल में देने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका दायरा बढ़ने से कहीं के लोग हों, उन्हें मदद दी जाती है। बैतुल माल में सदका, फितरा, जकात और खैरात देने के लिए गुजारिश की जाती है। जिससे कमेटी के जरिए सही हाथों में मदद पहुंच सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें