वाराणसी। भूकंप की भविष्यवाणी मुमकिन नहीं है लेकिन थोड़ी सी सतर्कता से भूकंप से होने वाले जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल कर इस प्राकृतिक आपदा से बचाव किया जा सकता है। देश की 82 फीसदी आबादी भूकंप जोन में है। यहां भूकंपरोधी भवन निर्माण की तकनीक उपलब्ध है, बस जनता को जागरूक होने की जरूरत है। भूकंपरोधी भवन के निर्माण पर आम भवन से सात से आठ फीसदी अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। यह जानकारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की विशेषज्ञ समिति के सदस्य डॉ. प्रदीप रमनचर्ला ने दी।
डॉ. प्रदीप हाल ही में भारत सरकार की ओर से नेपाल भेजी गई विशेषज्ञ टीम में शामिल थे और वहां के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके लौटे हैं। शुक्रवार की दोपहर आईआईटी बीएचयू में एक सेमिनार में शामिल होने आए डॉ. प्रदीप ने पत्रकारों को बताया कि नेपाल में पिछले दिनों आए भूकंप
में करीब ढाई लाख मकान जमींदोज हो गए और इतने ही मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। बताया कि भारत में हिमालयन रेंज के क्षेत्र भूकंप जोन में आते हैं, इनमें दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर, उत्तराखंड, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित पूर्वोत्तर के सभी राज्य शामिल हैं। देश में करीब 56 फीसदी भू क्षेत्र ऐसा है, जहां भूकंप का खतरा है। इन इलाकों में देश की 82 फीसदी आबादी रहती है।