वाराणसी। बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र पर चल रही दस दिवसीय कार्यशाला के आठवें दिन मध्य एशिया में पंचतंत्र के प्रसार पर वक्ताओं ने विस्तृत चर्चा की। बीएचयू संस्कृत विभाग के डॉ. राजेश सरकार ने कहा कि भारत की ग्लोबल ब्रांडिंग का हिस्सा पंचतंत्र रहा है। भारत से मध्य एशियाई संबंध के मूल में भी पंचतंत्र ही है, जिसने भारत का परिचय पूरे विश्व से कराया।
डॉ. राजेश सरकार ने कहा कि विश्व की 50 भाषाओं में पंचतंत्र के लगभग 200 संस्करण उपलब्ध हैं। सर्वप्रथम ‘पहेलवी’ भाषा में तथा अरबी में ‘कलीलवुध्यिम्न’ के रूप में पचतंत्र मध्यकालीन एशिया में गया। अंग्रेजी विभाग के डॉ. विवेक कुमार सिंह ने कहा कि पंचतंत्र जैसा ग्रंथ भारतीय शैक्षिक माहौल को सुधारने में संजीवनी का काम करेगा। इस दौरान डॉ. त्रिलोचन शांडिल्य, डॉ. राहुल चतुर्वेदी, डॉ. मलय झा, डॉ. अमित पांडेय, सुनील मानस, ईशान त्रिपाठी, धीरज कुमार गुप्ता, डॉ. अनूप पति तिवारी, डॉ. ज्ञानेंद्र नारायण राय आदि मौजूद रहे।