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भागवत कथा सुनने से दूर होते हैं क्लेष

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ज्ञानपुर। नगर के शीला महल में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को स्वामी अनादि जी महाराज ने भागवत के महात्म्य के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि भागवत के श्रवण मात्र से मानव जीवन धन्य हो जाता है। स्वामी जी ने कहा कि भागवत पुराण को वेदों का सार कहा गया है। कथा के माध्यम से वेदों का सार युगों -युगों से मानव जाति तक पहुंचता रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हमारे जड़वत जीवन में चैतन्य का संचार करती है। जीवन को सुंदर बनाती है। भागवत एक ऐसी अमृत कथा है, जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। इसीलिए परीक्षित ने स्वर्गामृत के बजाय कथामृत की ही मांग की। स्वर्गामृत का पान करने से पुण्यों का तो क्षय होता है पापों का नहीं। किंतु कथामृत का पान करने से संपूर्ण पापों का क्षय हो जाता है। उन्होंने वृंदावन का अर्थ बताते हुए कहा कि यह इंसान का मन है। कभी कभी इंसान के मन में भक्ति जागृत होती है। लेकिन यह स्थायी नहीं होती। क्योंकि हम ईश्वर की भक्ति तो करते हैं। लेकिन हमारे अंदर वैराग्य और प्रेम उत्पन्न नहीं होता। इसीलिए वृंदावन में जाकर भक्ति देवी तो तरुणी हो गई। पर उनके पुत्र ज्ञान और वैराग्य निर्बल पड़े रहते हैं। स्वामी जी ने कहा कि व्यास जी कहते हैं कि भागवत कथा एक कल्पवृक्ष की भांति है। जो जिस भाव से कथा श्रवण करता है। वह उसमें मनोवांछित फल देती है। यह स्वयं हम पर निर्भर करता है कि हम संसार की मांग करते हैं या करतार की। भक्ति चाहिए तो भक्ति मिलेगी, मुक्ति चाहिए तो मुक्ति मिलेगी।
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