ज्ञानपुर। जिले में बुनियादी शिक्षा का हाल बदहाल है। जर्जर छतों के नीचे खतरों के बीच बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है। जिले में कई विद्यालय ऐसे हैं, जिनके भवन कभी भी ढह सकते हैं। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ की बानगी बड़वापुर परिषदीय विद्यालय में देखी जा सकती है। यहां जर्जर दीवारों के अलावा छत की सीलिंग से झांकती जंग लगी छड़ें खतरे का संकेत दे रहीं हैं। यही नहीं, बरसात में छतें टपकने लगती हैं और बच्चों को बस्ता लेकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन में शरण लेनी पड़ती है। छत से सीमेंट की छपाई टुकड़ों में गिरने लगती है। जिले के लगभग दो दर्जन परिषदीय विद्यालयों की यही हालत है। गत दो जुलाई से परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू हो चुका है। बुनियादी शिक्षा की नींव बने कई विद्यालयों के भवनों ढहने के कगार पर पहुंच गए हैं। कभी भी हादसा हो सकता है लेकिन अफसर बेफिक्र बने हुए हैं। ज्ञानपुर क्षेत्र के बड़वापुर प्राथमिक विद्यालय में खतरे के बीच हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। साफ सफाई की व्यवस्था राम भरोसे है। कक्षाओं में लगे खराब पंखे भी बदहाल स्थिति में व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं। शासन और प्रशासन की सक्रियता महज यूनिफॉर्म और बैग वितरण तक ही दिखाई देती है। कई विद्यालयों के भवन इस कदर जर्जर हो चुके हैं कि बारिश के मौसम में उसके नीचे बैठ पाना मुश्किल हो जाता है। वहीं स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच नहीं करने का संदेश देने वालों को प्राथमिक विद्यालयों के शौचालय की जरा भी फिक्र नहीं है। बदहाल शौचालयों के चलते खुले में शौच करने के लिए बच्चे मजबूर हैं। तीन कमरों में 101 बच्चों का अध्ययन कराया जाता है। इसमें 90-95 बच्चों की उपस्थिति नियमित रहती है। जिन जर्जर छतों के नीचे बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, किसी भी दिन बड़ा खतरा हो सकता है। परिषदीय स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या के पीछे स्कूलों में व्यवस्थाओं की बदहाली भी एक प्रमुख कारण है। कुछ ऐसा ही हाल यहां पूर्व माध्यमिक विद्यालय भवन का भी है। हालांकि बड़वापुर प्राथमिक विद्यालय की जर्जर छत और बिना लाइट, पंखे के बैठकर पढ़ने वाले बच्चों के हौंसले भी कम नहीं हैं। इस विद्यालय के बच्चों की बेहतर शैक्षणिक स्थिति के चलते डीएम, बीएसए और विधायक कई बार सम्मानित कर चुके हैं। प्राथमिक विद्यालय बडवापुर का भवन निर्माण 2005 में कराया गया था। इसमें पांच कमरे, शौचालय और रसोई घर का निर्माण हुआ था। इसमें एक कमरा पूरी तरह से जर्जर होने के कारण अनुपयोगी हो चुका है। एक कमरे में अध्यापक और अध्यापिकाओं के साथ स्कूल के जरूरी कागजात रखे जाते हैं। बाकी तीन कमरों में 101 बच्चों का कक्षाएं चलती हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामलाल सिंह यादव ने बताया कि बिल्डिंग जर्जर होने के कारण बारिश में कमरा पानी से भर जाता है। इसके चलते उन्हें बच्चों को जूनियर बड़वापुर के एक कमरे में बैठाया जाता है। इसके चलते बच्चों का पठन-पाठन प्राभवित होता है और विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति भी कम हो जाती है। परिषदीय विद्यालय ज्ञानपुर देहाती और सागररायपुर के भवनों की हालत भी जर्जर हो चुकी है। कुछ वर्षों में भी भवन की दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। इससे बच्चों की जान जोखिम में रहती है।