वाराणसी। अफसरों की जिम्मेदारी तय हो। साथ ही विकास के लिए जन सहभागिता हो तभी सही मायने में शहर का विकास हो सकेगा। शहर में हो रहे सभी विकास कार्यों के लिए बड़े अफसरों की सीधे तौर पर जवाबदेही होनी चाहिए। सरकारी एजेंसियों को ही दोष देना ठीक नहीं, बल्कि शहर के प्रत्येक नागरिक को जागरूक रहकर भ्रष्टाचार का विरोध करना होगा।
यह कहना है नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर रविवार को ‘अमर उजाला संवाद’ में शामिल होने आए प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं का। चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय में अधिवक्ताओं ने दो टूक कहा कि पार्षद और मेयर को भी अफसरों पर अंकुश लगाने का अधिकार मिलना चाहिए और शहरवासी अपने अधिकार के साथ अपने कर्तव्य को भी याद रखें।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यह अच्छी बात है कि हमारे सांसद देश के प्रधानमंत्री हैं। केंद्र से पैसा तो खूब मिल रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर ठोस काम दिख नहीं रहे हैं। इसके लिए सीधे तौर पर अफसरशाही जिम्मेदार है। लोगों की बुनियादी समस्याओं का निराकरण होता नहीं दिख रहा। सरकार ने नगर निगम में बेहतर काम हो, इसके लिए आईएएस अफसर की तैनाती की लेकिन जनता को इसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। शहर में प्रदूषण की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है लेकिन अफसर इसकी रोकथाम के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रहे हैं। विकास तभी सार्थक होगा जब लोगों को इसका अहसास हो। कागजों पर करोड़ों-अरबों खर्च कर देने भर से काशी को क्योटो की तरह विकसित करना महज एक सपना ही होगा।