वाराणसी। शहर की बदहाल पेयजल व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने अब खुद इसकी निगरानी शुरू कर दी है। शनिवार को यहां आए मंत्रालय के प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने वर्षों से चालू होने के इंतजार में शोपीस बने ओवरहेड टैंकों को जल्द से जल्द जनोपयोगी बनाने के निर्देश दिए। इसके लिए जलकल और जलनिगम के अधिकारियों को 31 अक्तूबर तक की आखिरी मोहलत दी। दो टूक कहा कि सभी 23 ओवरहेड टैंकों से जलापूर्ति जल्द से जल्द शुरू कराएं नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
मंडलीय सभागार में शहर की बुनियादी सुविधाओं और केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव का फोकस अरसे से अधर में लटकी पेयजल परियोजनाओं पर था। जल निगम के मुख्य अभियंता को निर्देश दिया कि सारनाथ में बनने वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य युद्धस्तर पर कराएं। इसके तैयार होने के बाद वरुणा पार के लाखों बाशिंदों को स्वच्छ पेयजलापूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। शहर के विभिन्न संयंत्रों से होने वाली सप्लाई की जानकारी ली। कहा कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराएं। दूषित जलापूर्ति हर हाल में रोकी जाए। सीवेज, सफाई, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता अभियान की भी की। सीवर कनेक्शन की पूरी डिटेल तैयार कराने के निर्देश दिए। ब्रांच सीवेज के अब तक सिर्फ 7000 चेंबर बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। इस मौके पर अपर सचिव शहरी विकास मंत्रालय के समीर शर्मा, प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज सिंह, कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल, जलकल के जीएम वीके सिंह, चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह मौजूद थे।