वाराणसी। रंगमंच के क्षेत्र में आगे बढ़ने की चाह रखने वाले युवा कलाकारों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से गठित संस्थान रंगशीर्ष की ओर से बुधवार को काव्यपाठ और नाटक का मंचन किया गया। मजदूर दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में एक ओर जहां काव्यपाठ में कविताओं के माध्यम से कवियों ने आम आदमी के जीवन की चर्चा की, वहीं नाटक में भी उसके संघर्षों को दिखाया।
डीएलडब्ल्यू स्थित मुक्ताकाशी रंगालय ‘मातरम’ में सुमित श्रीवास्तव, लक्की सिंह के देखरेख में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत काव्यपाठ से हुई। इसमें रुद्र प्रताप सिंह ने शलभ श्रीराम सिंह की कविता ‘जवाब-दर-सवाल हैं कि इंकलाब चाहिए, घिरे हैं हम सवाल से हमें जवाब चाहिए... की प्रस्तुति कर जरूरतमंदों की आवाज बुलंद की। प्रशांत ने ‘ओज की ऊर्जा प्रेम के बिना कारगर नहीं होती’ कविता पढ़ी। इसके साथ ही केदारनाथ सिंह की कविता ‘बनारस’ का भी पाठ किया।
कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र रोहितास जायसवाल द्वारा एकल नाट्य प्रस्तुति ‘बिखरे किस्से’ का मंचन रहा। इसमें रोहितास ने बनारस के चाय वाले, गाजीपुर के मौलवी और मुंबई में छिनैती के शिकार शख्स की कहानियाें पर प्रकाश डाला। ये वो कहानियां थी जो घटित तो हुईं, लेकिन इसका कहीं दस्तावेजीकरण नहीं है। कार्यक्रम का संचालन विवेक शर्मा और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सत्यदेव त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में प्रो. वाचस्पति, अजय मिश्र, वशिष्ठ त्रिपाठी, अजय सिंह, प्रो. रामप्रकाश द्विवेदी, प्रो. सदानंद शाही, डॉ. दीपक कुमार, वीणा सहाय, नीलम पाल आदि मौजूद रहे।