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अभी भी चेत नहीं रहे वरुणा और असि के गुनहगार

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वाराणसी। वरुणा और असि नदी को लेकर प्रशासन की उदासीनता इसके लिए जिम्मेदार विभागों पर भारी पड़ सकती है। दोनों नदियों में बहते मलजल और किनारों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का रुख सख्त है। इसके मद्देनजर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश जारी किया गया है कि नदियों को प्रदूषण से मुक्त करें। विभाग को एक महीने की मोहलत देने के साथ कार्रवाई और रिपोर्ट मुख्यालय भेजने का निर्देश दिया है।
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गंगा की सहायक नदियों वरुणा व असि का हाल यह है कि उसमें गंदगी बजबजा रही हैं। घरों का गंदा पानी बह रहा है। किनारे पहुंचने पर तेज दुर्गंध उठ रही है। वहां थोड़ी देर खड़ा रहना भी मुश्किल है। पुराने पुल के पास वरुणा में लाल पानी बह रहा था। नदियों की दुर्दशा देख एनजीटी टीम ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने हालात सुधारने के लिए सख्त निर्देश दिए थे। टीम के जाने के बाद से अभी तक दोनों नदियों से लेकर संबंधित विभागों की उदासीनता बरकरार है। ऐसे मेें बनारस को भी जुर्माने की कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है। आठ तारीख को इसके बारे में लखनऊ में बैठक भी होने जा रही है। बैठक में पूरी रिपोर्ट के बिंदुओं पर विचार-विमर्श कर फैसला लिया जाएगा।
बीते वर्ष एनजीटी, नई दिल्ली ने आमी बचाओ मंच की ओर से दायर याचिका पर प्रदेश सरकार पर एक लाख व नगर निगम गोरखपुर पर पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही प्रदूषण के मसले पर गंभीरता न दिखाने पर प्रदेश सरकार को फटकार भी लगाई है। गोरखपुर की आमी, राप्ती, रोहिन नदी एवं रामगढ़ ताल के प्रदूषण को लेकर आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्व विजय और मीरा शुक्ला की ओर से एनजीटी में याचिका दायर की गई थी।
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