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गुरु और शुक्र की युति और बढ़ाएगी काशी की ख्याति

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आलोक कुमार त्रिपाठी
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वाराणसी। ज्योतिषियों का मानना है कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन से काशी का चातुर्दिक विकास होगा और यहां की ख्याति संपूर्ण विश्व में फैलेगी। 21 से 23 जनवरी के दौरान ग्रहों की युतियां शुभ संयोग बना रही हैं। बनारस और भारत की कुंडली के सुखद संयोग में हुए इस आयोजन से देश को मजबूती मिलेगी और नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री आचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, बनारस की कुंडली में बृहस्पति एवं शुक्र का संचरण ख्याति देने वाला होगा। दोनों ग्रहों का संचरण वृश्चिक राशि में और दृष्टि वृषभ राशि पर है। यह युति बनारस के लिए सुखद परिणाम लेकर आएगी। भारत की वृष लग्न और कर्क राशि है। राशि के अनुसार, बृहस्पति का संचरण वृश्चिक राशि पर है। भारत की राशि से पंचम बृहस्पति का संचरण खास है। बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि भारत की राशि पर है। भारत की लग्न के अनुसार, जनता चतुर्थ भाव और प्रवासी भारतीय तृतीय भाव में है। कुंडली में बृहस्पति तुला का होकर तृतीय भाव में है।
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ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि माघ मास में आयोजित सम्मेलन राष्ट्र जागरण, सामाजिक समरसता तथा भारत की अखंडता में उल्लेखनीय योगदान देकर काशी की भौतिक उन्नति का सशक्त साधन बनेगा। वृश्चिक राशि का बृहस्पति, मकर राशि के सूर्य का संयोग काशी को विश्व पटल पर स्थापित करेगा।
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ज्योतिषाचार्य पं. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार बनारस की कुंडली में बन रहा संयोग खास है। गुरु और शुक्र की युति से संयोग बन रहा है, उससे विकास के नए आयाम खुलेंगे। आचार्य पं. वीरेंद्र तिवारी के अनुसार, गुरु की पूर्ण दृष्टि और शुक्र का समान राशि में संयोग देश और काशी के लाभदायक होने वाला होगा।
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