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आज बाजत बधाई बरसाने में

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वाराणसी। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में पूर्व आचार्यों की याद में आयोजित चार दिवसीय पूर्वाचार्य संगीत समारोह का समापन गुरुवार को हुआ। अंतिम दिन पद्मविभूषण किशोरी आमोनकर की स्मृति में आयोजित समारोह में गायन, सितार और तबला वादन के माध्यम से कलाकारों ने अपनी हाजिरी लगाई। इसमें राधाकृष्ण के प्रेम से लेकर भजनों से प्रभु का गुणगान और होली पर आधारित प्रस्तुतियों पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
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पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में प्रो. बिरेंद्र नाथ मिश्र, प्रो. शशि कुमार, प्रो. सरयू सोनी, वी सत्यवर प्रसाद, प्रो. प्रवीण उद्धव द्वारा पंडित ओंकारनाथ ठाकुर, मदन मोहन मालवीय और मां सरस्वती और किशोरी अमोनकर के प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद विदिशा हाजरा ने किशोरी अमोनकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
इसके बाद संगीत और वादन की शुरुआत हुई। इसमें गायन शुभांकर डे ने राग बसंत विलंबित एक ताल में ‘ऐ नवी के दरबार, सब मिल गाओ ऋतु बसंत की मुबारका’, मध्य लय तीन ताल में ‘देखो नई बसंत ऋ तु आई-डार-डार सब कोयलिया बोले’, द्रुत एक ताल में ‘शंकर हर जटा जूट’ की मधुर प्रस्तुति की। तबले पर ज्ञान स्वरूप मुखर्जी, हारमोनियम पर जमुना बल्लभ ने साथ दिया। डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय ने राग मुल्तानी में विलंबित एक ताल में ‘ऐ गोकुल गांव का छोरा बरसाने की नार’ और छोटा ख्याल तीन ताल में निबद्ध ‘आज बाजत बधाई बरसाने में-नर नारी मिल मंगल गाओ’ से राधा-कृष्ण के प्रेम का भाव प्रदर्शित किया। तबले पर संगतकार डॉ. रजनीश तिवारी के साथ भजन ‘सुन सुन साधो जी राजा राम कहो’ से समापन किया। गायन की अगली कड़ी में प्रो. संगीता पंडित ने राग मार्ग विहाग विलंबित एक ताल में ‘ऐ सखी अजहुं न आये, तीन ताल में लागे न जिया मोरा’ और दादरा ‘नजरिया लागे नही कहीं’ और ‘सावरिया प्यारा रे मोरी गुइयां’ गाकर सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया। तबले पर पंकज राय और हारमोनियम पर डॉ. इंद्रदेव चौधरी ने संगत किया। कार्यक्रम का संचालन ज्योति सिंह ने किया।
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सितार और तबला वादन से जीत लिया दिल
अंतिम दिन गायन के साथ ही वादन में सितार और तबला वादन की प्रस्तुति से कलाकारों ने सभी का दिल जीत लिया। डॉ. प्रेम कुमार मिश्र ने सितार वादन में राग परमेश्वरी की प्रस्तुति की। उन्होंने तबले पर कुबेर नाथ मिश्र, हारमोनियम पर डॉ. विजय कपूर के संगत में आलाप, जोड़, झाला, परंपरागत बंदिश की प्रस्तुति की। इसके बाद प्रो. बिरेंद्र नाथ मिश्र ने सितार वादन में ही राग हेमंत की धमार ताल में प्रस्तुति की। इसके अलावा राग दरबारी अड़ाना ,नायकी, सुहा, सुघराई और अंत में भैरवी में दादरा रस के भरे तोरे नैन की प्रस्तुति की। तबले पर पंडित कुबेर नाथ मिश्र ने संगत किया। अंतिम दिन की प्रस्तुतियों में पंडित पुंडलीक कृष्ण भागवत ने तबले की थाप पर सभी का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। दर्शकों से खचाखच भरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। भागवत ने दुर्लभ रचनाएं उठान, आमद, चलन, कायदा, रेल टुकड़ा, गत की प्रस्तुति की। हारमोनियम पर जमुना बल्लभ गुजराती ने संगत की।
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