वाराणसी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अश्वनी कुमार चौबे की अदालत में 17 वर्ष पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में चर्चित सुभाष ठाकुर को मंगलवार को पेश किया गया। फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से सुभाष को यहां पेशी पर लाया गया। मामले में सुनवाई की अगली तिथि 17 फरवरी निर्धारित की गई है। पेशी के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। सुभाष ठाकुर के समर्र्थक भी कचहरी परिसर में डटे रहे। पेशी के बाद सुभाष ठाकुर को वापस फतेहगढ़ सेंट्रल जेल ले जाया गया।
आरोपी के अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह गौतम के मुताबिक वर्ष 1991 के इस मामले में सुभाष ठाकुर के पास से नाइन एमएम के दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। सुभाष के खिलाफ लंबित मामले में अभियोजन की तरफ से गवाही दर्ज होनी है लेकिन सरकारी गवाहों के रिटायर हो जाने के कारण उनका पता नहीं लग पा रहा है। इस कारण गवाही नहीं दर्ज हो सकी। इसी के साथ अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 17 फरवरी नियत कर दी। इसके बाद सुभाष को कड़ी सुरक्षा में वापस फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इस प्रकरण में एक गवाह रहे आजमगढ़ निवासी सिपाही हरपाल सिंह यादव की मृत्यु के बाबत कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की गई जबकि अन्य गवाहों को हाजिर करने के लिए सम्मन जारी किया गया।
नोटबंदी से टूटी डी गैंग की कमर
कभी दाऊद इब्राहिम के साथी रहे सुभाष ठाकुर ने पेशी के बाद मंगलवार को यहां दावा किया कि सरकार के नोटबंदी के फैसले से डी गैंग (दाऊद गैंग) की कमर टूट गई। उसके नशा कारोबार समेत अन्य धंधों पर एक के बाद एक सरकार का शिकंजा कसने से दाऊद और उसके सहयोगी बौखलाए हुए हैं। मुंबई के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में उसका नेटवर्क कमजोर हो गया है। गौरतलब है कि 1992 के मुंबई दंगों के बाद छोटा राजन के साथ ही सुभाष ठाकुर ने भी दाऊद का साथ छोड़ दिया था।