वाराणसी। वरुणा कॉरिडोर योजना में भी नदी संरक्षण के प्रयासों से अधिक इसके सौंदर्यीकरण पर ध्यान दिया गया। जबकि, नदी विशेषज्ञों का कहना है कि वरुणा को जीवित रखने के लिए सबसे जरूरी है कि पहले अवैध कब्जे हटवाकर नदी में सीवेज का गिरना रोका जाए। उसके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित किया जाए। साथ ही, लिफ्ट कैनालों के जरिए नदी में साफ पानी का प्रवाह सुनिश्चित कराया जाए।
सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि तीन दशक पहले तक इलाहाबाद के मैनहट्टन ताल के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के कई छोटे-बड़े नालों से पानी वरुणा में आता था। समय के साथ इनमें कई नालों के अस्तित्व समाप्त हो गए और शहरी क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की व्यवस्था न होने से नदी में पानी की जगह सीवेज का दबाव बढ़ता चला गया। नदी वैज्ञानिकों का कहना है कि वरुणा के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल कराए बगैर कॉरिडोर के निर्माण का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। नदी में नालों से गिर रहा सीवर रोका जाए। साथ ही, इसकी ड्रेजिंग कराने के बाद ज्ञानपुर पंप कैनाल सहित जो भी वैकल्पिक माध्यम हैं उनके जरिए इसका निरंतर प्रवाह सुनिश्चित कराया जाए।
कॉरिडोर की शुरुआत डेढ़ साल पहले जब हुई थी तब ही नदी विशेषज्ञों ने सुझाव दिया था कि ड्रेजिंग शुरू कराने से पहले सीवेज का गिरना रोका जाए लेकिन कार्यदायी संस्थाओं ने उनकी सलाह को कोई तरजीह नहीं दी। मनमाने तरीके से ड्रेजिंग शुरू करा दी। एक ओर सफाई होती गई, दूसरी ओर सीवेज गिरने से गाद भरती गई। नतीजा कुछ नहीं निकला। अलबत्ता ड्रेजिंग के नाम पर लाखों रुपये खप गए। हालांकि शासन के हस्तक्षेप से सीवर रोकने के लिए नदी के दोनाें तरफ इंटरसेप्टर लाइन डालने का काम शुरू कराया जा चुका है। वरुणा में गिरने वाले 14 नालों को इस इंटरसेप्टर लाइन से जोड़ा जाएगा। यह इंटरसेप्टर लाइन गोइठहां और दीनापुर एसटीपी से जुड़ेगी।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार 26 दिसंबर को गंगा से पानी लिफ्ट कराके वरुणा में छोड़ने की योजना है। गंगा से वरुणा तक पानी पहुंचने में 55 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। हंडिया इलाहाबाद के केहुनी पंप हाउस से ज्ञानपुर मुख्य नहर के जरिए 43 किमी दूरी तय करके पानी भाला घाट पहुंचता है। यहां से तीन किमी दूरी स्थित कनेरी स्केप के जरिए पानी मोरवा ड्रेन में भेजा जाता है। वहां से नौ किमी दूरी तय करते हुए पानी वरुणा नदी में पहुंचता है। इस प्रक्रिया में दो दिन लग जाते हैं। यहां से सरायमोहाना स्थित वरुणा-गंगा संगम तक पानी पहुंचने में 25 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। डीएम बंगला से सरायमोहना के बीच कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।