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करपात्री जी के नाम पर चलेगी ट्रेन, डॉक टिकट भी जारी होगा

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वाराणसी। केंद्रीय जनजाति मामलों मंत्री जुआल ओरम ने शनिवार को धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के जीवन दर्शन को देश भर में प्रचारित-प्रसारित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे महान संत के चिंतन से देश-दुनिया को परिचित कराने की आवश्यकता है, ताकि सुखद भविष्य के निर्माण की दिशा में लोग प्रेरणा ले सकें। धर्म सम्राट के जीवन दर्शन पर डाक्यूमेंट्री बनाने की भी उन्होंने सलाह दी। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि धर्म स्रमाट के नाम पर ट्रेन चलाने और डॉक टिकट जारी करने के लिए वह दिल्ली जाते ही संबंधित मंत्रालयों को पत्र लिखेंगे, ताकि इस दिशा में जल्द प्रक्रिया शुरू कराई जा सके। केदार घाट स्थित करपात्र धाम में धर्म सम्राट की जयंती पर आयोजित परिसंवाद में उन्होंने यह बातें कहीं।
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जनजातीय मामलों के मंत्री ने कहा कि रामराज परिषद के बारे में एलके आडवाणी के भाषणों के जरिए उन्हें जानकारी मिली थी लेकिन ऐसे विराट व्यक्तित्व के बारे में यहां आने के बाद पता चला। उन्होंने कहा कि वेद भारत आत्मा हैं। देश की राष्ट्र भाषा संस्कृत होनी चाहिए थी। ऐसा होता तो लोग अपने मूल के बारे में सहजता से जान पाते। संस्कृत का ज्ञान बहुतायत लोगों को न होने से वेद -उपनिषद की संपदा से हम अनभिज्ञ रह गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिपाठी ने कहा कि स्वामी करपात्री जी महाराज का चिंतन भारत के मूल स्वभाव और विचार से प्रेरित हैं। भारत का आशय है जो ज्ञान के अनुसंधान में लगातार लगा हो। देवता भी जिसकी स्तुति गाते हैं, वह भारत भूमि धन्य है। उन्होंने स्वामी करपात्री जी महाराज के चिंतन को आत्मसात करने पर जोर दिया। इस मौके पर पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी, राजस्थान के लोकायुक्त सज्जन सिंह कोठारी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक साहू, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे, गीता प्रेस के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका ने विचार व्यक्त किए। संचालन रोहित सिंह ने किया। अध्यक्षता अभिषेक ब्रह्मचारी ने की।
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