दरअसल, लोकसभा चुनाव के चलते यह मामला योगी सरकार की प्राथमिकता में नहीं रहा। इसीलिए अब तक सरकार ने अपनी तरफ से इस फैसले को चुनौती नहीं दी है, लेकिन प्रभावित हो रहे बीटीसी/बीएड अभ्यर्थिओं ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती दे दी है। अब सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, यह वक्त ही बताएगा।
लेकिन इसकी मार अब बेचारे अभ्यर्थियों को झेलनी पड़ रही है, जो कड़ी मेहनत करके विभिन्न परीक्षाओं में भाग लेकर पास होते हैं। अंत में आकर वे राजनैतिक और विभागीय गलतियों का शिकार बनते हैं।
अब देखना है कि योगी सरकार कैसे इस भर्ती को न्यायालय में बचाती है, क्योंकि 69,000 अभ्यर्थियों के साथ-साथ प्राथमिक विद्यालयों में नौनिहाल भी अपने योग्य शिक्षक की बाट जोह रहे हैं।