गृहकर के दायरे में 62 हजार नए भवन स्वामी आ गए हैं। जल्द ही नोटिस भेजकर गृहकर वसूला जाएगा। इसकी औपचारिकता पूरी की जा रही है। नगर निगम प्रशासन सख्ती का मन बना चुका है। नगर निगम क्षेत्र के 62 हजार भवन स्वामी अब तक गृहकर नहीं दे रहे हैं। यह तथ्य जीआईएस सर्वे से सामने आया है। गृहकर के रिकाॅर्ड में 2.18 भवन स्वामी हैं, लेकिन सर्वे से पता चला कि भवनों की संख्या 2.80 लाख है। अब भवन स्वामियों को जोनवार नोटिस भेजा जा रहा है। ज्यादातर भवन व्यवसायिक व आवासीय हैं। जो भवन पहले भूतल तक थे, वे तीन तल के बन गए हैं। इसके बावजूद गृहकर भूतल के ही दिए जा रहे हैं। ऐसे भवनों की संख्या कैंटोनमेंट क्षेत्र में ज्यादा है।
30 सितंबर तक गृहकर जमा करने पर मिलेगी दस फीसदी की छूट
नगर के सभी भवन स्वामियों को गृहकर जमा करने पर 10 फीसदी छूट दी जा रही है। यह सुविधा 30 सितंबर 2023 तक मिलती रहेगी।
ऑनलाइन जमा कर सकते हैं गृहकर
गृहकर जमा करने की ऑनलाइन सुविधा दी गई है। वेबसाइट 222.ठ्ठठ्ठ1ठ्ठह्य.शह्म्द्द.द्बठ्ठ पर जाकर गृहकर जमा किया जा सकता है।
जीआईएस सर्वे में 62 हजार ऐसे भवन मिले हैं, जिनके गृहकर नहीं जमा हो रहे हैं। गृहकर जमा करने का नोटिस भेजा जा रहा है। यदि किसी दिक्कत है तो वह लिखित आपत्ति के जरिये गृहकर का सही मूल्यांकन करा सकता है। - शिपू गिरि, नगर आयुक्त
ऐसे तय होता है गृहकर
गृहकर का वार्षिक मूल्यांकन सर्किल रेट के आधार पर तय होता है। नगर निगम क्षेत्र में अधिकतम 1.70 रुपये और न्यूनतम 65 पैसा प्रति वर्ग फीट प्रति माह की दर गृहकर लिया जाता है। खाली प्लाटों का कर 10 पैसे प्रति वर्ग फीट तय है। जितने वर्गफीट की जमीन होगी, उसी आधार पर कर पड़ता है। गृहकर का वार्षिक मूल्यांकन तय करने के लिए कुल जमीन में 20 फीसदी जमीन बाथरूम और शौचालय का हिस्सा निकाल दिया जाता है। इसके बाद 80 फीसदी जमीन का गुणा गृहकर तय किया जाता है। जो धनराशि बनती है, उसका 11 फीसदी गृहकर तय किया जाता है। 50 हजार रुपये से अधिक गृहकर आने पर 15 फीसदी और 50 हजार से कम होने पर 11 फीसदी गृहकर देना पड़ता है।