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पुलिस इतनी काबिल है यारों, आजम की भैंस ढूंढ लेती है

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वाराणसी। ‘तरीके इतने न जाने कैसे ढूंढ लेती है ये, ऐंठने किससे कितने हैं ये पैसे ढूंढ लेती है, हमारे देश की पुलिस है इतनी काबिल यारों कि एक ही दिन में आजम खान की भैंसे ढूंढ लेती है’ यह दर्द दुर्गेश दुबे के काव्य पाठ में छलका, जिनके साथ ललिता घाट पर मारपीट हुई और बाद में वे पुलिस की मनमानी के शिकार भी हुए।
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डीरेका के 71वें स्थापना दिवस पर मंगलवार को रंगशाला में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथि डीरेका के मुख्य यांत्रिक इंजीनियर व संस्थान के अध्यक्ष योगेश मोहन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद संस्थान के सचिव आलोक सिंह बेताब द्वारा लिखित पुस्तक संवेदना का विमोचन हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त राम प्रवेश तिवारी रागेश व संचालन राष्ट्रीय कवि दुर्गेश दुबे ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लोगों ने संचालन करने के लिए मना किया, बावजूद इसके मैं यहां आया। दुर्गेश ने काव्य पाठ के माध्यम से वाराणसी पुलिस पर करारा प्रहार भी किया।
बाद में संचालन विकास सिंह बौखल को सौंप दिया। विकास ने सुनाया कि किसी के हिस्से में मकां आया तो किसी के हिस्से में दुकां आई, मैं तो सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मेरी मां आई। कनक तिवारी गोला और कुमार दीपक ने गीत व हास्य कविताओं से सबको गुदगुदाया। करुणा सिंह ने सरस्वती वंदना चैती में प्रस्तुत की। नसीमा निशा, हीरालाल मिश्र, सिद्धनाथ शर्मा, महेंद्र अलंकार, जितेंद्र प्रसाद भिखारी, सत्यम शुक्ला, सूर्य प्रकाश मिश्र आदि कवियों ने कविता पाठ के माध्यम से तालियां बटोरीं।
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