वाराणसी। बीएचयू हिंदी विभाग में शोध छात्रों के समूह रचना समय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में जाने माने आलोचक नामवर सिंह के साहित्यिक योगदान पर चर्चा हुई। बतौर मुख्य वक्ता प्रो. प्रणय कृष्ण ने कहा कि भाषा, समाज और संस्कृति के क्षेत्र में नामवर सिंह ने दूसरी परंपरा की खोज की, जिसे लोग हमेशा याद करते हैं।
विभाग के सभागार में ‘नामवर सिंह का रचना संसार’ विषयक संगोष्ठी में प्रो. प्रणय ने कहा कि हिंदी साहित्य के निर्माण में अपभ्रंश और प्रतिरोध की संस्कृति की क्या भूमिका है इसकी खोज भी नामवर जी ने ही की थी। विशिष्ट वक्ता अनुज लुगुन ने कहा कि नामवर की दूसरी परंपरा की खोज साहित्य की ओर से संस्कृति की एक धारा की खोज है।
हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष और आलोचक प्रो. बलिराज पांडेय ने नामवर जी के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने पाठ आधारित आलोचना से हिंदी को परिचित कराया। गोष्ठी को प्रो. राजकुमार, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. वशिष्ठ अनूप, प्रो. श्रद्धा सिंह, प्रो. मनोज कुमार सिंह, डॉ. योगेश प्रताप शेखर, दिवाकर तिवारी, पंकज यादव, दीप्ति और अवनीश पांडेय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन संजय विक्रम सिंह, दीपिका दूबे, प्रिया भारतीया, सुशांत शर्मा ने किया।