सेवापुरी। आराजीलाइन विकास खंड के भाऊपुर (टेकरिया) गांव के आसपास शिमला मिर्च की खेती बहुतायत की जा रही है। इससे किसान मालामाल हो रहे हैं। इसकी खेती से प्रति हेक्टेयर 7 से 8 लाख रुपये किसान की आमदनी कर रहे हैं।
शिमला मिर्च की खेती किसानों के लिए फायदेमंद हो साबित हो रही है। कई किसान इससे अच्छी आमदनी कर रहे हैं। साथ ही आसपास के लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। इस क्षेत्र करीब दो दर्जन किसान शिमला मिर्च की खेती करते हैं। शहर से सटा होने से मार्केट भी मिल जाता है।
भाऊपुर (टेकरिया) गांव निवासी किसान वीरेंद्र कुमार पटेल 30 वर्षों से शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं। इन्होंने बताया कि शिमला मिर्ची की खेती दो एकड़ भूमि पर करते हैं। नर्सरी 10 अगस्त से 15 अगस्त के बीच डाली जाती है। 25 से 30 दिन में नर्सरी तैयार होती है और पौधे की रोपाई के 40 से 45 दिन बाद पौधों में फली लगनी शुरू हो जाती है। फसल की पैदावार प्रति एकड़ प्रति तुड़ाई 25 से 27 कुंतल होती है। पूरी फसल की तोड़ाई 12 से 15 बार की जाती है। इसकी खेती में प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये की लागत आती है। बाजार में मिर्च 20 से 50 रुपये किलोग्राम तक बिक जाता है। प्रति एकड़ 7 से 8 लाख रुपये की आमदनी होती है। वहीं किसान वीरेंद्र पटेल ने बताया कि हमारे गांव में शिमला मिर्च की खेती अधिकतर किसान करते है और अपनी जीविकोपार्जन करते हैं।
मंचिंग विधि से करते हैं खेती
मंचिंग विधि से खेती करने अच्छी फसल पैदा हो रही है। जमीन की खुदाई करके प्लास्टिक डालने के बाद मिट्टी डाली जाती है। इसमें खाद और कीटनाशक दावाएं मिलने के बाद एक परत प्लास्टिक की बिछा दी जा है। डेढ़ फुट पर होल काटकर पौधे रोपे जाते हैं। खर पतवार पौधे के पास नहीं पहुंच पाते हैं। इससे पैदावार ज्यादा होती है।