वाराणसी। केंद्र सरकार के अंतरिम बजट से निराश अधिवक्ताओं को प्रदेश सरकार के बजट से भी हताशा हाथ लगी। इससे क्षुब्ध अधिवक्ता अब सरकार के खिलाफ आंदोलन का मन बना चुके हैं।
सेंट्रल बार अध्यक्ष शिवपूजन सिंह गौतम के अनुसार सरकार के उपेक्षात्मक नजरिये से वकीलों को ठेस पहुंची है। अधिवक्ता हितोें की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब हम सब चुप नहीं बैठेंगे। बनारस बार अध्यक्ष राजेश मिश्र ने कहा कि प्रदेश सरकार के बजट से अधिवक्ता काफी आशान्वित थे लेकिन निराशा हाथ लगी। ऐसे में आंदोलन के अलावा अब कोई चारा नही बचा है। अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगों में 60 वर्ष के अंदर मौत पर मिलने वाले पांच लाख की राशि के लिए आयु सीमा 70 वर्ष करने और अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ से पांच लाख करने की मांग वर्षों से लंबित है।
इसके अलावा युवा अधिवक्ताओं को मानदेय और बुजुर्गों को पेंशन, चैंबर, आवास, मेडिक्लेम की सुविधा के साथ ही एमएलसी सीट आरक्षित करने की मांग की जा रही है। प्रदेश के साथ देश स्तर पर अधिवक्ताओं के लिए कोई वेलफेयर स्कीम न चलने से वकीलों को केंद्र और राज्य की सरकार से काफी उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। इसी वजह से आल इंडिया बार कौंसिल ने देश भर में 12 फरवरी को विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन देने का आह्वान किया है।