वाराणसी। मौनी अमावस्या के अगले दिन मंगलवार को गंगा स्नान और काशी विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा रेला उमड़ा कि पूरे शहर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। हालत यह रही कि दशाश्वमेध सहित अन्य प्रमुख गंगा घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर एक किलोमीटर की दूरी तय करने में 45 मिनट से ज्यादा समय लग गया। इस दौरान चौराहों और तिराहों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे लेकिन श्रद्धालुओं के हुजूम के आगे उनका वश न चल पाया। सुबह से बेपटरी हुई यातायात व्यवस्था रात 10 बजे के बाद सामान्य हुई। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार रोजाना औसतन 10 हजार चार पहिया वाहन शहर में बाहर से आते हैं। मंगलवार को दो लाख चार पहिया वाहन शहर में आए और इसके वजह से व्यवस्था ध्वस्त हुई।
प्रयागराज में मौनी अमावस्या का स्नान कर श्रद्धालु मंगलवार की भोर से ही काशी आना शुरू कर दिए थे। भारी भीड़ उमड़ने की संभावना के मद्देनजर गिरजाघर चौराहा से गोदौलिया चौराहा होते हुए मैदागिन चौराहा तक नो व्हीकल जोन घोषित किया गया था मगर यह सारे उपाय नाकाफी प्रतीत हुए। भारी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं के कारण रथयात्रा चौराहा से गुरुबाग होते हुए लक्सा मार्ग पर राहगीरों को भीषण जाम का सामना करना पड़ा। इसी तरह से रथयात्रा से सिगरा, साजन तिराहा, फातमान, मलदहिया चौराहा होते हुए लहुराबीर तक सड़क पर यातायात का अत्यधिक दबाव रहा और जाम लगा। मैदागिन चौराहा से कबीरचौरा होते हुए लहुराबीर चौराहा से चेतगंज और बेनियाबाग, नई सड़क तक भी राहगीरों की खासी फजीहत हुई।
इस संबंध में एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि रूट डायवर्जन और पार्किंग की व्यवस्था के साथ 18 चौराहों पर यातायात पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। अत्यधिक भीड़ और वाहनों के दबाव के कारण राहगीरों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ा।