वाराणसी। जाम से निजात दिलाने के लिए शुरू की जा रही ट्रैफिक व्यवस्था अब तक शहर में फेल नजर आ रही है। इसकी वजह यहां पुलिस कर्मियों की मनमानी भी है। उनके इशारे पर लाल बत्ती पर भी ट्रैफिक चलता है और ग्रीन सिग्नल वाली साइड को रुकना पड़ता है। यकीन नहीं हो तो सिगरा चौराहे पर जाकर देख लें। यहां करीब सारा दिन ही जाम जैसी स्थिति रहती है।
कम चौड़ाई वाले इस चौराहे पर जब से ट्रैफिक लाइट लगी है स्थिति में सुधार की जगह और बिगड़ गई है। पुलिस कर्मी भी सिग्नल को नजर अंदाज कर अपने हिसाब से व्यवस्था का संचालन कराते नजर आते हैं। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम हकीकत जानने पहुंची तो इसी तरह का नजारा दिखा।
कैंट-रथयात्रा और सिदगिरी बाग-महमूदगंज को जोड़ने वाले इस चौराहे पर शाम का नजारा व्यवस्था की पोल खोलने वाला था। यहां, कैंट से रथयात्रा को जाने वालों के लिये 70 सेकेंड और सिदगिरी बाग और मंडुवाडीह की ओर जाने वालों को 35 सेकेंड का ग्रीन सिग्नल था। कैंट से रथयात्रा की तरफ जाने वालों को 120 सेकेंड रुकना पड़ रहा था, जबकि 60 सेकेंड जाने का मौका मिल रहा था। लेकिन इस सिग्नल व्यवस्था का पालन होते नहीं दिखा। लोग चौराहे पर रेड सिग्नल देखते, लेकिन वहां तैनात सिपाही के संकेत को देख आगे बढ़ जा रहे थे। दूसरी ओर स्टाप लाइन या जेब्रा लाइन न होने के कारण जाम से बचने के लिए वे आड़े-तिरछे कर अपने वाहन निकला रहे थे। उधर, ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी का कहना था कि अगर सिग्नल के अनुसार ट्रैफिक चलाएंगे तो जाम की समस्या और बढ़ जाएगी। इस सिग्नल की सेटिंग ठीक नहीं है। सड़क की चौड़ाई कम है और जेब्रा लाइन तक अभी नहीं बनी।