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ब्ल्यू प्रिंट को अंतिम रूप देने की कवायद तेज

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वाराणसी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को ब्ल्यू प्रिंट को सार्वजनिक करने की कवायद तेज हो गई है। ब्ल्यू प्रिंट को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा जा चुका है। इसमें जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। इसके बाद इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि पीएमओ से इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। कहा तो यह भी जा रहा है कि यदि सब कुछ व्यवस्थित तरीके से चला तो इसी महीने के अंत में प्रस्तावित दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कॉरिडोर का शिलान्यास भी कराया जा सकता है।
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सूत्रों की मानें तो प्रयास हो रहा है कि पीएम मोदी की यात्रा के पहले ब्ल्यू प्रिंट को अंतिम रूप देकर जनता के सामने रख दिया जाए। इस तरह से अधिकारी कॉरिडोर की कार्ययोजना को लेकर तमाम तरह के भ्रम दूर करना चाहते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का दावा है कि ब्ल्यू प्रिंट को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन संयुक्त रूप से कार्य कर रहा है। बाबा दरबार से गंगा तक प्रस्तावित पाथवे पर श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर है।
कॉरीडोर के लिए प्रारंभिक तौर पर तैयार किए गए ब्ल्यू प्रिंट को लेकर सिंह पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री से मिले थे। इस दौरान धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रमुख सचिव भी मौजूद थे। ब्ल्यू प्रिंट में कुछ खामियों की ओर इशारा करते हुए सिंह से इसमें सुधार करने के लिए कहा गया। अब उन्हीं पर काम चल रहा है। जानकारों की मानें तो अगर एक पखवारे में ये सारी प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही इस पर पीएमओ की मुहर लग गई तो प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर उनसे अनुरोध किया जाएगा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास करें। दरअसल, ऐसा करने के पीछे मंतव्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को बाबा दरबार में आने के लिए प्रेरित करना है।
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गौरतलब है कि बाबा दरबार से गंगा तक पाथवे के लिए शासन ने 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। पहली किस्त के तौर पर 44 करोड़ रुपये मिले थे। पिछले सप्ताह 150 करोड़ रुपये और मिल चुके हैं। फिलहाल भवनों खरीदने के काम को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर बाबा दरबार से गंगा दर्शन पाथवे में 166 भवन चिह्नित किए गए हैं। इनमें 43 मंदिर हैं। अभी तक ध्वस्त किए गए पांच भवनों में तीन मंदिर मिले हैं। इनसे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
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