ज्ञानपुर। दिन: बुधवार, स्थान: एआरटीओ कार्यालय भदोही, समय: सुबह 10 बजे। कार्यालय के ज्यादातर कक्षों में ताले लटके हुए थे। ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के कागजात बनवाने के लिए दूर-दराज से आए दर्जनों लोग इधर-उधर भटक रहे थे लेकिन न तो अधिकारी पहुंचे थे, न कर्मचारी। कितने बजे तक साहब आएंगे? बार-बार यह सवाल लोगों के बीच हवा में तैरता रहा। हां, इस समय तक दलाल और आउट साइडर पहुंच चके थे। इसी बीच 10.25 बजे कक्ष संख्या 13 में एक कर्मचारी पहुंचता है। 10.30 बजे कक्ष संख्या 11 और 13 में दो कर्मचारी ताला खोल कर दाखिल होते हैं। हालांकि काम अब भी शुरू नहीं हो सका। एआरटीओ सत्येंद्र यादव 10.55 बजे। 11.15 बजे बाद इसके बाद धीरे-धीरे काउंटरों पर काम शुरू होता है।
यह वास्तविक तस्वीर है जिलाधिकारी कार्यालय के सामने स्थित सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय की, जहां हर रोज सैकड़ों लोग जरूरी काम के सिलसिले में दूर-दूर से पहुंचते हैं। दलाली और आउट साइडरों की कारस्तानी से आए दिन चर्चा में रहने वाले एआरटीओ कार्यालय की कार्यशैली नहीं सुधर रही। बुधवार को अमर उजाला की टीम सुबह 10 बजे एआरटीओ कार्यालय पहुंची तो यहां लाइसेंस और गाड़ी के कागजात बनवाने पहुंचे दर्जनों लोग प्रचंड गर्मी में अधिकारियों और कर्मचारियों की राह ताकते बैठे थे। सुबह 10:30 बजे लाइसेंस कक्ष, 10:25 बजे कैश काउंटर और 10:20 बजे कंप्यूटर कक्ष खुला। बाकी के कमरे में ताले लटकते रहे। 10.55 बजे कार्यालय पहुंचे एआरटीओ सत्येंद्र यादव ने बताया कि वह सुबह गाड़ी चेकिंग के लिए चौरी चले गए थे, इसलिए ऑफिस पहुंचने में देर हुई। महराजगंज से गाड़ी का कागज बनवाने आए राजू ने बताया कि मैं दो दिन से कार्यालय आ रहा हूं, लेकिन 11.30 बजे से पहले यहां कोई कर्मचारी काम शुरू नहीं करते। वहीं अलग-अलग जगहों से आए कमलेश कुमार, राहुल सोनकर, सूरज आदि ने अधिकारियों और कर्मचारियों के देर से आने पर नाराजगी जाहिर की। पूर्व में लेटलतीफी को लेकर कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज भी गिर चुकी है, लेकिन उनकी कार्यशैली में सुधार नहीं है। लाइसेंस विभाग के एक कर्मचारी पर 2016 में लापरवाही में निलंबन की कार्रवाई भी हो चुकी है, बावजूद इसके कार्यशैली में सुधार नहीं है।