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शहर में फिर गहराई कैश की किल्लत

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वाराणसी। नोटबंदी के बाद जिले में एकबारगी फिर कैश की किल्लत गहरा गई है। अधिकतर बैंकों के एटीएम खाली हैं और लोग नगदी के लिए एक से दूसरे एटीएम पर भटक रहे हैं। लगन के सीजन में नगदी संकट ने आम लोगों को परेशान कर रखा है। बैंक प्रबंधनों के मुताबिक बैंकों में लगन के सीजन में नगदी जमा अनुपात कम होने से ऐसी दिक्कत आई है। स्थिति से आरर्बीआई को अवगत कराया गया है। साथ ही, अपनी-अपनी जरूरत के अनुरूप बैंकों ने आरबीआई से कैश की डिमांड की है।
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बैंकों में कैश की किल्लत का असर सबसे अधिक एटीएम सेवा पर है। बैंकों से नगद निकासी या फिर चेक से आहरण करने पर भी अधिकतर छोटे नोट दिए जा रहे हैं। दो हजार और पांच सौ के नोट बैंकों के पास पर्याप्त उपलब्ध नहीं हैं। सबसे अधिक उपलब्धता दस, बीस और पचास के नोटों की है। ये नोट एटीएम में नहीं डाले जा सकते। नोटबंदी के बाद कैलिब्रेट हुए तमाम एटीएम में सिर्फ दो हजार और पांच सौ के नोट ही भरे जा सकते हैं। हालांकि कई एटीएम ऐसे हैं जहां दो हजार, पांच सौ के साथ ही सौ के भी नोट भरे जा सकते हैं लेकिन बड़े नोटों की किल्लत के चलते ये एटीएम दो-चार घंटे में ही खाली हो जा रहे हैं। कैश की किल्लत शहर से गांवों तक बनी हुई है। पिछले हफ्ते भर से स्थिति लगातार गंभीर हो रही है। मंगलवार को एसबीआई, यूनियन बैंक, बैंक आफ बड़ौदा आदि बैंकों के अधिकतर एटीएम पर नो कैश का बोर्ड लगा था। ककरमत्ता स्थित एचडीएफसी बैंक का शटर गिरा हुआ था। लंका स्थित यूनियन बैंक, आईसीआईसीआई, सुंदरपुर पीएनबी, गुरुधाम स्थित इलाहाबाद बैंक, भदैनी स्थित एसबीआई के एटीएम में भी रुपये नहीं थे। कज्जाकपुरा, पीलीकोठी, कालभैरव मंदिर के पास लगे एटीएम में तीन-चार दिनों से कैश नहीं भरे जाने से लोग परेशान हैं। जिस किसी एटीएम में रुपये होने की जानकारी मिल रही थी, लोगों की वहां भीड़ लग जा रही थी। कुछ एटीएम पर तो नोटबंदी की तरह ही कतारे लगी दिखीं।
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