वाराणसी। गीता जयंती पर भारत धर्म महामंडल के एक धड़े ने बुधवार की दोपहर मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिला स्थित परमहंसी गंगा आश्रम पहुंचकर द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर सविधि अभिषेक कर दिया। भव्य समारोह में पादुका पूजन के बाद आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित मठाम्नाय महानुशासन के अनुसार ज्योतिष्पीठ पर अभिषेक की प्रक्रिया अपनाई गई। श्रृंगेरी पीठ के शिष्य अनंत भट्ट, पुरी पीठ के शिष्य पंडित देवदत्त दूबे, द्वारिका शारदा पीठ के शिष्य स्वामी सदानंद ने स्वामी स्वरूपानंद को तिलक लगाकर अभिषेक किया।
दोपहर बाद ढाई बजे श्री भारत धर्म महामंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्य नारायण पांडेय, डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुर्वेदी, काशी विद्वत परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी समेत अन्य प्रतिनिधियों और विद्वानों की मौजूदगी में सबसे पहले मंगलाचरण हुआ। श्रृंगेरी पीठ के विद्वान अनंत भटट, पंडित श्याम बादल, पंडित वीरेश्वर दातार, पंडित गगन चट्टोपाध्याय, पंडित संतोष दातार ने मंगलाचरण किया। इसके बाद अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, स्वामी सदानंद ने पादुका पूजन किया। पुष्प अर्पण के बाद शंकराचार्य पद पर अभिषेक के लिए विषय स्थापन ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद ने किया। इसके बाद भारत धर्म महामंडल के प्रवक्ता ने हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में रिक्त हुई ज्योतिष्पीठ पर स्वामी स्वरूपानंद के अभिषेक के लिए निर्णय के क्रम में संतों, विद्वानों के समर्थन पत्र को पढ़कर सुनाया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी के समर्थन पत्र को पढ़कर सुनाया गया। रास्ते में कार खराब होने के कारण कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके। इस मौके पर पंडित श्रीप्रकाश मिश्र, परमेश्वर दत्त, दिनेश मणि त्रिपाठी, अवध नारायण पांडेय, जितेंद्र दूबे आदि मौजूद रहे। संचालन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया।