वाराणसी। स्वच्छता का अभियान निरंतर जारी रहना चाहिए। इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़ी कामयाबियां मिलती हैं। बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हर कोई आगे आए। अपने-अपने स्तर से प्रयास करे। यह दृढ़ निश्चय वाली सरकार है। कठोर फैसले लेने में कभी पीछे नहीं हट सकती। ये बातें केंद्रीय शहरी विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहीं। वह बुधवार को यहां आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट और नगर निगम की ओर से आयोजित ‘संवाद’ को संबोधित कर रहे थे। शहरी विकास मंत्रालय संभालने के बाद पहली बार वाराणसी आए तोमर ने संवाद के दौरान बनारस के आधारभूत ढांचे, नमामि गंगे और स्वच्छता अभियान पर फोकस किया।
उन्होंने कहा कि वाराणसी को 2018 तक ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े फैसलों को लागू किया और उसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। तीन सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के विधि, न्याय, युवा एवं खेल राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर तक बनारस को कचरा मुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। अध्यक्षता बीएचयू के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने की। उन्होंने कहा कि बनारस के विकास को यहां की संस्कृति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। महापौर रामगोपाल मोहले ने कहा कि गांधी जी ने दो नारे लगाए थे पहला क्विट इंडिया और दूसरा क्लीन इंडिया। पहला तो पूर्ण हो चुका है लेकिन दूसरा अभी बाकी है। सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रवि रंजन गुरु ने कहा कि बनारस अनोखा शहर है। यहां के लोग अपनी संस्कृति और धरोहरों को लेकर चिंतित हैं। बनारस आधुनिकता और परंपरा के बीच फंसा हुआ है और इसका समाधान हमें ढूंढना होगा। प्रोफेसर यूके चौधरी ने कहा कि गंगा बीमार है और उसे इलाज चाहिए। गंगा सिकुड़ रही हैं, सिमट रहीं हैं और समय रहते हम नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगी। प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि बनारस के विकास की योजना लखनऊ में नहीं बनाई जा सकती है। उसकी नीति बनारस में ही बनानी होगी।
संवाद के तीन सत्रों को शहर विकास मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. रामचंद्रन, यूरोपियन यूनियन के भारत में प्रतिनिधि पियर रोबर्ट हर्मिट, वाटर मैन ऑफ ओडिशा के नाम से जाने वाले रंजन पांडा और अपर नगर आयुक्त सचिदानंद सिंह ने संबोधित किया।