वाराणसी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कॉन्वेंट स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले में पारदर्शिता न बरतने की शिकायत शिक्षा का अधिकार अभियान के सदस्यों ने सोमवार को जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी से की। आरोप लगाया कि निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश देने में हीलाहवाली की जा रही है। आधे से ज्यादा आवेदन अकारण निरस्त कर दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के किसी बच्चे को सूची में स्थान नहीं मिला है। कई निजी स्कूल चयनित बच्चों को प्रवेश देने से मना कर दे रहे हैं।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने छह जुलाई को निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की बैठक बुलाने का आश्वासन दिया। बैठक में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया को सहज और पारदर्शी बनाने का मुद्दा रखा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि प्रवेश देने से मना करने वाले विद्यालयाें के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की सूची तत्काल घोषित की जाए। 10 जुलाई तक ऐसा नहीं हुआ तो वो मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में वल्लभ पांडेय, विनय सिंह, गौतम सिंह, धनंजय त्रिपाठी, चिंतामणि सेठ, प्रेम कुमार, अमन यादव आदि शामिल रहे।
अब तक 3277 हुए दाखिले
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत इस सत्र में अब तक 3277 दाखिले हो गए हैं। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में कान्वेंट स्कूलों में अब तक इतने गरीब बच्चों को दाखिला दिलाया गया है। जुलाई तक आरटीई के तहत पांच हजार दाखिले का लक्ष्य है।