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Varanasi News: वाराणसी सहित 10 जिलों में रजिस्टर्ड दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन को मिली 6 महीने की मोहलत

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प्रदेश में उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत विलेखों के डिजिटाइजेशन कार्य को पूरा करने के लिए शासन ने 10 जिलों को अतिरिक्त छह माह की समय-सीमा प्रदान की है। स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख सचिव अमित द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर और प्रयागराज में प्रथम चरण का डिजिटाइजेशन कार्य तय अवधि में पूरा नहीं हो सका था, जिसके चलते अब इसकी अंतिम समय-सीमा 29 जनवरी 2026 से बढ़ाकर अगले छह माह कर दी गई है
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शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि यह विस्तार केवल अवशेष पंजीकृत विलेखों के डिजिटाइजेशन को पूरा करने के लिए दिया गया है। इसके तहत स्कैनिंग और इंडेक्सिंग का कार्य उसी स्वीकृत बजट के भीतर किया जाएगा, जो पहले चरण के लिए निर्धारित किया गया था। शासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस दौरान वित्तीय अनुशासन और कम खर्च का विशेष ध्यान रखा जाए। अमित गुप्ता द्वारा जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि उप निबंधक कार्यालयों में शेष स्कैनिंग एवं इंडेक्सिंग कार्य को शीघ्रता से प्रारंभ कराया जाए। यदि निर्धारित नई समय-सीमा में भी कार्य पूरा नहीं होता है, तो प्रत्येक स्तर पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
गुणवत्ता को लेकर भी शासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। शासनादेश के अनुसार डिजिटाइजेशन कार्य इस तरह किया जाए कि प्रत्येक प्रविष्टि की शुद्धता सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही प्रगति की पखवाड़ेवार रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप पर शासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।
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गौरतलब है कि प्रदेश में पंजीकृत दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन का उद्देश्य भूमि और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित, पारदर्शी और ऑनलाइन उपलब्ध कराना है, ताकि आम नागरिकों को रजिस्ट्री से जुड़े मामलों में सुविधा मिल सके और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाया जा सके।
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