राम ज्योति जलाने की हुई थी अपील
केवल चंद बताते हैं कि पांच दिसंबर 1992 को काशी से कार सेवकों के साथ सैकड़ों लोगों का जत्था जब अयोध्या के लिए प्रस्थान करने लगा तो हम लोगों को खेतासराय (जौनपुर) में ही रोक दिया गया। वहां चल रही हलचल के बारे में हमें अवगत कराया गया। हम रूक गए, रात वहीं पर कटी। आसपास के लोगों ने हम लोगों को अपने घर से शाकाहारी भोजन दिया।
दोपहर होते-होते हम लोगों को यह सूचना मिली की विवादित ढांचा ढहा दिया गया। यह सुनते ही पूरा खेतासराय जय श्रीराम के नारे से गूंज उठा। हर किसी की आंखें भर आर्इं। लोग एक-दूसरे गले लगाकर बधाई देने लगे।
वाराणसी पहुंचने के बाद अगले दिन हमें हर घर में राम ज्योति जलवाने के निर्देश दिए गए थे। हम लोगों ने इसे पूरा भी किया। तेलियाना के राम जानकी मंदिर में भी दीप जलाए गए। रातभर राम भजन हुआ। इसके साथ ही राम मंदिर के लिए हर घर से एक र्इंट और एक रुपये की अपील की गई थी। कई लोगों ने इसमें भरपूर सहयोग दिया।
बनवाई गई थी भगवा रंग की अबीर
केवल चंद बताते हैं कि 1993 में मार्च महीने में होली के दिन हम लोगों ने भगवान रंग की 11 किलो अबीर बनवाई थी। इसे आॅर्डर देकर काशीपुरा के एक व्यापारी से बनवाया गया था। पहली बार हम लोगों ने भगवा रंग के अबीर से होली खेली थी। हर कोई राम मंदिर बनने की खुशी थी। लेकिन हमारे पांच कार सेवक भी मारे गए थे इसका हमें हमेशा खेद रहेगा।