तिब्बती संस्थान में कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में चल रहे पाली एवं संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय भिक्षु आदान-प्रदान कार्यक्रम के दूसरे दिन चतुर्थ तकनीकी सत्र में श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड एवं लाओस से पधारे 56 भिक्षु शामिल हुए। प्रतिभागियों के समक्ष संस्थान के विद्यार्थियों ने तिब्बती परंपरानुसार अभिधर्म पर शास्त्रार्थ का प्रदर्शन किया। त्रिदिवसीय कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन परम पावन दलाई लामा के साउथईस्ट एशिया ऑफिस, तिब्बती बौद्ध केंद्र, सिंगापुर और केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान की ओर से संयुक्त रूप से पाली और संस्कृत बौद्ध परंपराओं के बीच संवाद और सद्भाव मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। कार्यक्रम समन्वयक भिक्षु निमा नेगी ने बताया कि विद्या-अध्ययन की भारतीय परंपरा में शास्त्रार्थ का विशिष्ट स्थान रहा है। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के पाठ्यक्रम में शास्त्रार्थ एक अनिवार्य अंग है। इस अवसर पर समस्त भिक्षुसंघ की ओर से बौद्ध धर्म-दर्शन की थेरवादी एवं महायानी परंपरानुसार विश्व शांति के लिए सूत्रपाठ भी किया गया।