वाराणसी। बीएचयू में प्रो. हरिहर नाथ त्रिपाठी फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में पर्यावरण कानून और नीति पर चर्चा की गई। बतौर मुख्य अतिथि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया अमन लेखी ने पर्यावरण विधि पर बोलते हुए सुशासन और आर्थिक संतुलन के साथ धारणीय विकास की महत्ता पर बल दिया। कहा कि पुरातन ज्ञान और पाश्चात्य विकास की धारणा में समन्वय जरूरी है। ऐसा इसलिए कि क्योंकि इसमें द्वंद है।
केएन उडप्पा सभागार में भारत में पर्यावरण कानून और नीति में उभरती हुई प्रवृत्ति विषयक कार्यशाला में अमन लेखी ने कहा कि व्यवहारिकता में जब तक राजनीतिक भ्रष्टाचार न्यून नहीं किया जाएगा तब तक प्रदूषणकर्ता को दोषी मानकर प्रदूषण में कमी नहीं लायी जा सकती है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य सरकारी संस्थाओं को सार्थक कदम उठाने होंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण और नागरिक हितों का समुचित ध्यान कभी दिया और कभी नहीं दिया है। कार्यक्रम का संयोजन बीएचयू विधि संकाय के डॉ. क्षेमेंद्र मणि त्रिपाठी ने किया। इस दौरान प्रो. आरपी पाठक, प्रो. आरएस उपाध्याय, प्रो. कविता शाह, प्रो. आनंद शंकर सिंह, प्रो. विभा त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।