वाराणसी। जिले में डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसमें शहर की तुलना में ग्रामीण इलाके ज्यादा प्रभावित हैं। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में बने डेंगू वार्ड भर गए हैं और यहां से मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। वरुणापार के पांडेयपुर, टकटकपुर, धौरहरा आदि में तो अब तक मरीजों की संख्या 40 से अधिक हो गई है।
डेंगू मरीजों के लिए मंडलीय अस्पताल, दीनदयाल अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में अलग डेंगू वार्ड जो बनाया गया है, वह भी फुल हो गया है। मंडलीय अस्पताल के आठ बेड वाले वार्ड में सब पर मरीज भर्ती हैं, इसके अलावा कुछ मरीजों को पास के वार्ड में भी शिफ्ट किया जा रहा है।
दीनदयाल अस्पताल में दो महीने के भीतर डेंगू के संभावित 100 मरीज आ चुके हैं। जिसमें करीब 40 में पुष्टि हो चुकी है। वहीं बीएचयू अस्पताल में डेंगू का इलाज करा रहे तीन लोगों की मौत हो चुकी है। शहरी क्षेत्र में रविंद्रपुरी में एक ही परिवार के तीन लोग डेंगू की चपेट में आ गए हैं। इसमें संदीप पहलादका (50), सौरभ प्रहलादका (38) और चैतन्य प्रहलादका (23) का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। जबकि वरुणापार इलाके के टकटकपुर, अजय विहार, गौतम विहार, बजरंग विहार, श्यामपुरी कालोनी में भी डेंगू का प्रकोप फैलने की संभावना है। उधर काशी विद्यापीठ ब्लाक के अधिकांश गांवों में लोग बुखार से पीड़ित हैं। कुछ लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तो कुछ निजी अस्पताल में जांच कराने पहुंचे। हालांकि अभी किसी में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई हैं।
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डेंगू किट खत्म, कैसे होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग भले ही मरीजों के बेहतर इलाज का दावा कर रहा हो लेकिन उसके हर दावे फेल हो रहे हैं। दीनदयाल अस्पताल में इसका प्रमाण देखने को मिला। यहां सोमवार को 46 लोगों की जांच होनी थी लेकिन किट न होने की वजह से केवल 22 की जांच ही हो पाई। किट के अभाव में 24 लोगों को बिना जांच वापस कर दिया गया।
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आईएमए ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की बढ़ी डिमांड
डेंगू पीड़ितों की संख्या बढ़ने के साथ ही ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की डिमांड भी बढ़ गई हैं। आईएमए में जहां आम दिनों में 100 से 120 यूनिट ब्लड और प्लेटलेटस की मांग रहती है, वहीं पिछले एक सप्ताह से यह आंकड़ा 300 के पार जा रहा है। यहां कोई एक तो कोई दो से तीन यूनिट प्लेटलेटस की मांग कर रहा है। कभी-कभी तो मारामारी की नौबत आ जा रही है।